कर दिया आज पित्तरों को विदा...
पर कहां होते हैं, दिल से जुदा..!
हमारी चाल-ढाल, भाषा, हाव-भाव में...
संग चलते हैं, जीवन की राह में...
नहीं देख छू सकते हैं उनको...
पर कहां भूल सकते हैं उनको..!
जीवन उनकी यादों से है लदा...
कहां होते हैं दिल से जुदा..!
जीवन के मीठे फीके रंग में...
महसूस करते हैं उनको संग में...
आती है जब मुश्किल की घड़ी...
राह दिखाती है उनकी छड़ी...
तरसता है मन मिलने को सदा...
कहां होते हैं दिल से जुदा..!
लाल-पीली मोली में, तिलक की रोली में...
मन्त्र की बोली में, गोत्र की टोली में...
पूजा की थाली में, कलश-कुशा निराली में...
हंसी की ताली में, रात शगुनों वाली में...
ख्यालों में दिख जाते हैं यदाकदा...
कहां होते हैं दिल से जुदा..!
आ जाते हैं आंखों में, जब बजते हैं बाजे...
ढ़ूंढ़ते हैं उनको, देहरी-दरवाजे...
उनका ही अंश हैं, उनका ही वंश हैं।
जीवन का यही सारांश हैं।
यही तो हैं हमारे संस्कार...
कहां होते हैं दिल से जुदा..!
🙏🏻 जय श्री राम ⛳
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