रविवार, 9 जुलाई 2017

संत रविदास और इस्लाम

आज 'जय भीम, जय मीम' का नारा लगाने वाले दलित भाइयों को आज के कुछ राजनेता कठपुतली के समान प्रयोग कर रहे हैं। यह मानसिक गुलामी का लक्षण है। दलित-मुस्लिम गठजोड़ के रूप में बहकाना भी इसी कड़ी का भाग हैं। दलित समाज में संत रविदास का नाम प्रमुख समाज सुधारकों के रूप में स्मरण किया जाता हैं। संत रविदास जाटव या चमार कुल से सम्बंधित माने जाते थे। चमार शब्द चंवर का अपभ्रंश है। 

चर्ममारी राजवंश का उल्लेख महाभारत जैसे प्राचीन भारतीय वांग्मय में मिलता है। प्रसिद्ध विद्वान डॉ विजय सोनकर शास्त्री ने इस विषय पर गहन शोध कर चर्ममारी राजवंश के इतिहास पर पुस्तक लिखा है। इसी तरह चमार शब्द से मिलते-जुलते शब्द चंवर वंश के क्षत्रियों के बारे में कर्नल टाड ने अपनी पुस्तक ‘राजस्थान का इतिहास’ में लिखा है। चंवर राजवंश का शासन पश्चिमी भारत पर रहा है। इसकी शाखाएं मेवाड़ के प्रतापी सम्राट महाराज बाप्पा रावल के वंश से मिलती हैं। संत रविदास जी महाराज लम्बे समय तक चित्तौड़ के दुर्ग में महाराणा सांगा के गुरू के रूप में रहे हैं। संत रविदास जी महाराज के महान, प्रभावी व्यक्तित्व के कारण बड़ी संख्या में लोग इनके शिष्य बने। आज भी इस क्षेत्रा में बड़ी संख्या में रविदासी पाये जाते हैं।        

उस काल का मुस्लिम सुल्तान सिकंदर लोधी अन्य किसी भी सामान्य मुस्लिम शासक की तरह भारत के हिन्दुओं को मुसलमान बनाने की उधेड़बुन में लगा रहता था। इन सभी आक्रमणकारियों की दृष्टि ग़ाज़ी उपाधि पर रहती थी। सुल्तान सिकंदर लोधी ने संत रविदास जी महाराज मुसलमान बनाने की जुगत में अपने मुल्लाओं को लगाया। सिकन्दर लोदी के समय सदना पीर प्रसिध्द था लेकिन हिन्दु संत रविदास के सामने तो तुच्छ था।

एक दिन सधना पीर ने सोचा कि आजकल रविदास का बड़ा नाम हो रहा है... मीराबाई जैसी रानी भी इनको मानती है। पीर ने सोचा की मैं रविदास को समझाऊंगा कि काफिरो की परंपरा छोड़ दें और कलमा पढ़ ले, जिससे हजारो हिन्दू मुस्लमाऩ हो जायेगें और अपनी जमात बढ़ जायेगी... लेकिन सँत रविदास कहा कम थे, उन्होने बोला कि मुल्ले सुऩ -
खुदा कलाम कुराऩ बताओ, फिर क्यों जीव मारकर खाओं...?
खुदा नाम बलिदाऩ चढाओं, सो अल्लाह को दोष लगाओं...
दिनभर रोजा ऩमाज गुजारे, संध्या समय पुऩः मुर्गी मारें...
भक्ति करे फिर खून बहावे, पामर किस विधि दोष मिटावे..?
जिसमें जीव हिंसा लिखी, वह नहीं खुदा कलाम...
दया करे सब जीव पर, सो ही अहले इस्लाम...
निराकार तुम खुदा बताओं, कुरान खुदा का कलाम ठहराओं..!
कलाम कहे तो बनै साकारा, फिर कहाँ रहा खुदा निराकारा..?

संत रविदास की रहस्यमयी बातें सुनकर सदना पीर को सदबुध्दि प्राप्त हुई और उसऩे संत रविदास से दीक्षा ली और ऩाम रखा गया रामदास 

सिकंदर लोदी अपने षड्यंत्रा की यह दुर्गति होने पर चिढ़ गया और उसने संत रविदास जी को बंदी बना लिया और उनके अनुयायियों को हिन्दुओं में सदैव से निषिद्ध खाल उतारने, चमड़ा कमाने, जूते बनाने के काम में लगाया। इसी दुष्ट ने चंवर वंश के क्षत्रियों को अपमानित करने के लिये नाम बिगाड़ कर चमार सम्बोधित किया। चमार शब्द का पहला प्रयोग यहीं से शुरू हुआ। संत रविदास जी महाराज की ये पंक्तियाँ सिकंदर लोधी के अत्याचार का वर्णन करती हैं। 

वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान

फिर मैं क्यों छोड़ूँ इसे पढ़ लूँ झूट क़ुरान

वेद धर्म छोड़ूं नहीं कोशिश करो हजार

तिल-तिल काटो चाही गोदो अंग कटार

चंवर वंश के क्षत्रिय संत रविदास जी के बंदी बनाने का समाचार मिलने पर दिल्ली पर चढ़ दौड़े और दिल्लीं की नाकाबंदी कर ली। विवश हो कर सुल्तान सिकंदर लोदी को संत रविदास जी को छोड़ना पड़ा। इस झपट का ज़िक्र इतिहास की पुस्तकों में नहीं है, मगर संत रविदास जी के ग्रन्थ रविदास रामायण की यह पंक्तियाँ सत्य उद्घाटित करती हैं...

बादशाह ने वचन उचारा, मत प्यादरा इस्लाम हमारा।

खंडन करै उसे रविदासा, उसे करौ प्राण कौ नाशा...

जब तक राम नाम रट लावे, दाना-पानी यह नहीं पावे।

जब इस्लाम धर्म स्वीरकारे, मुख से कलमा आप उचारै।

पढ़ें नमाज जभी चितलाई, दाना-पानी तब यह पाईं...

जैसे उस काल में इस्लामिक शासक हिंदुओं को मुसलमान बनाने के लिए हर संभव प्रयास करते रहते थे वैसे ही आज भी कर रहे हैं। उस काल में दलितों के प्रेरणास्रोत्र संत रविदास सरीखे महान चिंतक थे। जिन्हें अपने प्रान न्योछावर करना स्वीकार था, मगर वेदों को त्याग कर क़ुरान पढ़ना स्वीकार नहीं किया।

मगर इसे ठीक विपरीत आज के दलित राजनेता अपने तुच्छ लाभ के  लिए अपने पूर्वजों की संस्कृति और तपस्या की अनदेखी कर रहे हैं।  

 दलित समाज के कुछ राजनेता जिनका काम ही समाज के छोटे-छोटे खंड बाँट कर अपनी दुकान चलाना है, अपने हित के लिए हिन्दू समाज के टुकड़े-टुकड़े करने का प्रयास कर रहे हैं।

 आईये संत रविदास जी की सुने, जिन्होंने अनेक प्रलोभन के बाद भी पैशाचिकता के पथ इस्लाम को स्वीकार नहीं किया।

🙏🏻 जय सनातन ⛳ जय रैदास 🪔

क्या करते हैं हमेशा खुश रहने वाले...


जिंदगी में खुश कौन नहीं रहना चाहता! लेकिन कुछ लोग हैं जो हमेशा खुश रहते हैं। आइए देखें ऐसा क्या करते हैं हमेशा खुश रहने वाले लोग. ..
खुश रहने वाले खुद पर अविश्वास नहीं करते।
खुश रहने वाले अजनबियों को भी नजरअंदाज नहीं करते।
खुश रहने वाले किसी को कुछ इसलिए नहीं देते कि उन्हें उनसे कुछ चाहिए।
खुश रहने वाले किसी को बदलने की कोशिश नहीं करते और जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करते हैं।
खुश रहने वाले केवल दिमाग से ही नहीं, दिल से भी सोचते हैं।
खुश रहने वाले किसी भी बात को पर्सनली नहीं लेते।
खुश रहने वाले अपने भय पर काबू रखते हैं।
खुश रहने वाले किसी को माफी देने से मना नहीं करते।
खुश रहने वाले किसी विवाद को सुलझाने के लिए हाथापाई का सहारा नहीं लेते।
खुश रहने वाले कुछ ऐसा करने में भी असहजता महसूस नहीं करते, जो उन्हें पसंद न हो। अपने सपनों और इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं करते...
खुश रहने वाले अपने भीतर की आवाज सुनते हैं। खुश रहने के लिए बाहर की तरफ नहीं देखते। खुद में ही खुशी ढूंढते हैं।
खुश रहने वाले किसी भी बदलाव को खुशी से स्वीकार करते हैं।
खुश रहने वाले दूसरे उनके बारे में क्या सोचते हैं, इसे बहुत ज्यादा महत्व नहीं देते। किसी को लेकर जजमेंटल नहीं होते। उनका लहजा कभी शिकायती नहीं होता।
खुश रहने वाले ऐसा कभी नहीं सोचते कि वे टूट चुके हैं।
खुश रहने वाले रिस्क लेने से नहीं घबराते।
खुश रहने वाले दूसरों को दोष नहीं देते और अपनी जिंदगी की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं।

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

जिस परिवार में विपदा आई हो उसके साथ इस संकट की घड़ी में जरूर  खडे हों
और तन, मन, धन से सहयोग करें...
पर मृतक भोज का बहिष्कार करें।

महाभारत युद्ध होने को था,
अतः श्री कृष्ण ने दुर्योधन के घर जा कर युद्ध न करने के लिए संधि करने का आग्रह किया ।
दुर्योधन द्वारा आग्रह ठुकराए जाने पर श्री कृष्ण को कष्ट हुआ और वह चल पड़े,
तो दुर्योधन द्वारा श्री कृष्ण से भोजन करने के आग्रह पर कृष्ण ने कहा कि

’’सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनैः’’

अर्थात्

"जब खिलाने वाले का मन प्रसन्न हो, खाने वाले का मन प्रसन्न हो,
तभी भोजन करना चाहिए।

लेकिन जब खिलाने वाले एवं खाने वालों के दिल में दर्द हो, वेदना हो,
तो ऐसी स्थिति में कदापि भोजन नहीं करना चाहिए।"

हिन्दू धर्म में मुख्य 16 संस्कार बनाए गए है,
जिसमें प्रथम संस्कार गर्भाधान एवं अन्तिम तथा 16वाँ संस्कार अन्त्येष्टि है।
इस प्रकार जब सत्रहवाँ संस्कार बनाया ही नहीं गया तो सत्रहवाँ संस्कार 'तेरहवीं संस्कार' कहाँ से आ टपका।

इससे साबित होता है कि तेरहवी संस्कार समाज के चन्द चालाक लोगों के दिमाग की उपज है।

किसी भी धर्म ग्रन्थ में मृत्युभोज का विधान नहीं है।
बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
लेकिन जिसने जीवन पर्यन्त मृत्युभोज खाया हो, उसका तो ईश्वर ही मालिक है।

इसीलिए ...
महर्षि दयानन्द सरस्वती,,
पं0 श्रीराम शर्मा,
स्वामी विवेकानन्द
जैसे महान मनीषियों ने मृत्युभोज का जोरदार ढंग से विरोध किया है।

जिस भोजन बनाने का कृत्य...
जैसे लकड़ी फाड़ी जाती तो रोकर,
आटा गूँथा जाता तो रोकर एवं
पूड़ी बनाई जाती है तो रोकर...
यानि हर कृत्य आँसुओं से भीगा।
ऐसे आँसुओं से भीगे निकृष्ट भोजन एवं तेरहवीं भोज का पूर्ण रूपेण बहिष्कार कर समाज को एक सही दिशा दें।

जानवरों से सीखें,

जिसका साथी बिछुड़ जाने पर वह उस दिन चारा नहीं खाता है।
जबकि 84 लाख योनियों में श्रेष्ठ मानव,
जवान आदमी की मृत्यु पर हलुवा पूड़ी खाकर शोक मनाने का ढ़ोंग रचता है।

इससे बढ़कर निन्दनीय कोई दूसरा कृत्य हो नहीं सकता।

यदि आप इस बात से सहमत हों,
तो आप आज से संकल्प लें कि आप किसी के मृत्यु भोज को ग्रहण नहीं करेंगे।

मृत्युभोज समाज में फैली कुरीति है व समाज के लिये अभिशाप है ।
🙏समाज हित में.... 🙏

आइये आपको सिद्ध करके दिखाता हूं कि आतंकवादी सिर्फ मुसलमान ही होता हैं...


1 -मुसलमानो के साथ कौन सा ऐसा अत्याचार हुआ है जो वे अन्य धर्म के लोगो को मारने के लिये आतुर रहते है ?
2- ओसामा बिन लादेन जो पेशे से इंजिनियर था, अरबपति था , उसकी किस बहन बेटी के साथ किसी हिंदू ,सिख ,ईसाई ने बलात्कार कर दिया जो उसने इन सबको मारने की सौगंध खा ली . और पुरी दुनिया में निर्दोषो का खुन बहाया ?
3 - याकुब मेमन जो इसी देश में रहकर सी ए बना और रुत्वा हासिल किया उसकी कौन सी संपत्ति हिंदू ने हडपी थी या उसके साथ कौन सा ऐसा अन्याय हुआ था जो उसने 257 लोगों को मारा और 713 लोगों को अपाहिज बना दिया. क्या इन लोगों ने याकूब की अम्मी का बलत्कार किया था इसी को आतंकवाद कहते हैँ।
4 - भारत में आज़ादी के समय सिर्फ 2 % मुसलमान थे और आज 25 % है क्या ये दोष था इस देश के हिंदुओ का जो उन्होने इनको फलने फूलने का मौका दिया और आज इस देश में हिंदुओ से ज्यादा अधिकार मुसलमानो को है मगर अब यही मुसलमान हिंदुओ के खुन के प्यासे हैं , उनके मंदिरो में विश्फोट करते है , जगह जगह उन्हे मारने के लिये ब्लास्ट करते है ! ये है आतंकवाद
5 - बगदादी और isis के उपर कौन सा ऐसा ज़ुल्म हुआ है जो भारत ने किया है की वो भारत में हमला कर गैर मुस्लिमो का खुन बहाना चाहता है। ये है आतंकवाद
6 - क्या बिगाडा है सिरिया , इराक लीबिया नाईजीरिया इन देशों के तमाम गैर मुस्लिमों ने क्या बिगाडा हैँ मुस्लिमों का जो रह दिन ना जाने कितने ही निर्दोषों का कत्लेआम किया जाता हैँ इसे कहते है आतंकबाद मित्रो मुसलमान ही सिर्फ आतंकवादी है। इस बात को साबित करने के लिये मैं और 100 उधाहरण दे सकता हूं। किंतु फिर भी ये ज़िहादी खुद को नेक काम करने वाला ही बतायेंगे। 100 हिन्दुओ के बीच एक मुस्लिम परिवार आआइये आपको सिद्ध करके दिखाता हूं की आतंकवादी सिर्फ मुसलमान ही होता है 1 -मुसलमानो के साथ कौन सा ऐसा अत्याचार हुआ है जो वे अन्य धर्म के लोगो को मारने के लिये आतुर रहते है ? 2- ओसामा बिन लादेन जो जो पेशे से इंजिनियर था, अरबपति था , उसकी किस बहन बेटी के साथ किसी हिंदू ,सिख ,ईसाई ने बलात्कार कर दिया जो उसने इन सबको मारने की सौगंध खा ली . और पुरी दुनिया में निर्दोषो का खुन बहाया ? 3 - याकुब मेमन जो इसी देश में रहकर सी ए बना और रुत्वा हासिल किया उसकी कौन सी संपत्ति हिंदू ने हडपी थी या उसके साथ कौन सा ऐसा अन्याय हुआ था जो उसने 257 लोगों को मारा और 713 लोगों को अपाहिज बना दिया. क्या इन लोगों ने याकूब की अम्मी का बलत्कार किया था इसी को आतंकवाद कहते हैँ। 4 - भारत में आज़ादी के समय सिर्फ 2 % मुसलमान थे और आज 25 % है क्या ये दोष था इस देश के हिंदुओ का जो उन्होने इनको फलने फूलने का मौका दिया और आज इस देश में हिंदुओ से ज्यादा अधिकार मुसलमानो को है मगर अब यही मुसलमान हिंदुओ के खुन के प्यासे हैं , उनके मंदिरो में विश्फोट करते है , जगह जगह उन्हे मारने के लिये ब्लास्ट करते है ! ये है आतंकवाद
5 - बगदादी और isis के उपर कौन सा ऐसा ज़ुल्म हुआ है जो भारत ने किया है की वो भारत में हमला कर गैर मुस्लिमो का खुन बहाना चाहता है। ये है आतंकवाद 6 - क्या बिगाडा है सिरिया , इराक लीबिया नाईजीरिया इन देशों के तमाम गैर मुस्लिमों ने क्या बिगाडा हैँ मुस्लिमों का जो रह दिन ना जाने कितने ही निर्दोषों का कत्लेआम किया जाता हैँ इसे कहते है आतंकबाद मित्रो मुसलमान ही सिर्फ आतंकवादी है। इस बात को साबित करने के लिये मैं और 100 उधाहरण दे सकता हूं। किंतु फिर भी ये ज़िहादी खुद को नेक काम करने वाला ही बतायेंगे।
100 हिन्दुओ के बीच एक मुस्लिम परिवार आराम से रह सकता है पर 100 मुस्लिम के बीच एक हिन्दू परिवार नहीं रह सकता अब समझ जाओ खामी कहा पर है....

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

पुराने संस्कारो की वजह से न चाहते हुये भी बुरे और खराब विचार आते रहते है... इनको कैसे रोके ?


यह सवाल बहुतो को आता होगा।

एक उदाहरण
समझो एक बालटी है जिसमें कीचड़ भरा पडा है। आपको उस कीचड़ को, बिना कीचड़ को हाथ लगाये बिना बालटी को टेढा किये बालटी से निकालना है ताकी उसमे साफ पानी रख पायें। ...... कैसे?

आप उस बालटी को सिर्फ एक नल के नीचे रखकर नल को खोल दो। जब पानी भर जायेगा तो वह बहने लगेगा। साथ मे कीचड़ भी बहेगा।
उसे तब तक बहने दो जब तक बालटी का पूरा कीचड़ निकल नही जाता और पूरी बालटी सफेद पानी से नही भर जाती।

इसी तरह हमारे मन को भी जो कीचड़ रुपी Negative विचार आते है उन्हे बंद करने के लिये Positive विचार और परमात्मा के महावाक्यो के सफेद पानी से रोज भरते रहीये।
धीरे-धीरे Negative विचारों का आना अपने आप बंद हो जायेगा।
रोज सोने से Just पहले और उठने के तुरंत बाद अपने मन को अच्छे-अच्छे विचारों से सजाये।
✍🏻 कमल सिंघल🌞
🙏🏻जय श्री राम.⛳

बुधवार, 5 जुलाई 2017

RIP का मतलब...

ये RIP क्या हैै..?
आजकल देखने में आया है कि किसी मृतात्मा के प्रति RIP लिखने का "फैशन" चल पड़ा है... ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि कान्वेंटी दुष्प्रचार तथा विदेशियों की नकल के कारण, हमारे युवाओं को धर्म की मूल अवधारणाएँ या तो पता ही नहीं हैं या विकृत हो चुकी हैं...
RIP शब्द का अर्थ होता है "Rest in Peace" (शान्ति से आराम करो) यह शब्द उनके लिए उपयोग किया जाता है.... जिन्हें कब्र में दफनाया गया हो क्योंकि ईसाई अथवा मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार जब भी "जजमेंट डे" अथवा "क़यामत का दिन"  आएगा... उस दिन कब्र में पड़ेे, ये सभी मुर्दे पुनर्जीवित हो जाएँगे... अतः उनके लिए कहा गया है कि उस क़यामत के दिन के इंतज़ार में "शान्ति से आराम करो"
लेकिन हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है। हिन्दू शरीर को जला दिया जाता है, अतः उसके "Rest in Peace" का सवाल ही नहीं उठता..! हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य की मृत्यु होते ही, आत्मा निकलकर किसी दूसरे नए जीव/काया/शरीर/नवजात में प्रवेश कर जाती है... उस आत्मा को अगली यात्रा हेतु गति प्रदान करने के लिए ही, श्राद्धकर्म की परंपरा निर्वहन एवं शान्तिपाठ आयोजित किए जाते हैं। अतः किसी हिन्दू मृतात्मा हेतु "विनम्र श्रद्धांजलि", "श्रद्धांजलि", "आत्मा को सदगति प्रदान करें" जैसे वाक्य विन्यास लिखे जाने चाहिए। जबकि किसी मुस्लिम अथवा ईसाई मित्र के परिजनों की मृत्यु पर उनके लिए RIP लिखा जा सकता है...
होता यह है कि श्रद्धांजलि देते समय भी शॉर्टकट अपनाने की आदत से, हममें से कई मित्र हिन्दू मृत्यु पर भी "RIP" ठोंक आते हैं... यह विशुद्ध "अज्ञान और जल्दबाजी" है, इसके अलावा कुछ नहीं... अतः कोशिश करें कि भविष्य में यह गलती ना हो एवं हम लोग "दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि" प्रदान करें... ना कि उसे RIP (apart) करें। मूल बात यह है कि चूँकि अंग्रेजी शब्द SOUL का हिन्दी अनुवाद "आत्मा" नहीं हो सकता, इसलिए स्वाभाविक रूप से "RIP और श्रद्धांजलि" दोनों का अर्थ भी पूर्णरूप से भिन्न हैै।
धार्मिक अज्ञान एवं संस्कार-परम्पराओं के प्रति उपेक्षा की यही पराकाष्ठा, अक्सर हमें ईद अथवा क्रिसमस पर देखने को मिलती है, जब अपने किसी ईसाई मित्र अथवा मुस्लिम मित्र को बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ देना तो तार्किक एवं व्यावहारिक रूप से समझ में आता है, लेकिन "दो हिन्दू मित्र"  आपस में एक-दूसरे को ईद की शुभकामनाएँ अथवा "दो हिन्दू मित्रानियाँ" आपस में क्रिसमस केक बाँटती फिरती रहें... अथवा क्रिसमस ट्री सजाने एक-दूसरे के घर जाएँ, तो समझिए कि निश्चित ही कोई गंभीर "बौद्धिक-सांस्कारिक गडबड़ी है...

मंगलवार, 4 जुलाई 2017

कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है इस बारे में जानकारी देंगें भारतीय चिकित्सा परिषद के सदस्य डॉ जितेंद्र गिल

                         *सोना*

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

                        *चाँदी*

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

                           *कांसा*

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         *तांबा*

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

                        *पीतल*

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         *लोहा*

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, लोहतत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

                         *स्टील*

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

                      *एलुमिनियम*

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

                           *मिट्टी*

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते हैं । इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैं मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।
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