बुधवार, 19 जुलाई 2017

आओ अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने.

यही है हमारी संस्कृति की पहचान.

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( ०१ )    दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

( ०२ )    तीन ऋण -

देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

( ०३ )    चार युग -

सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

( ०४ )    चार धाम -

द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

( ०५ )   चारपीठ -

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

( ०६ )   चार वेद-

ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !

( ०७ )   चार आश्रम -

ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !

( ०८ )   चार अंतःकरण -

मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !

( ०९ )   पञ्च गव्य -

गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !

( १० )   पञ्च देव -

गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !

( ११ )   पंच तत्त्व -

पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !

( १२ )   छह दर्शन -

वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !

( १३ )   सप्त ऋषि -

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!

( १४ )   सप्त पुरी -

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !

( १५ )   आठ योग -

यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समािध !

( १६ )   आठ लक्ष्मी -

आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !

( १७ )   नव दुर्गा --

शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !

( १८ )   दस दिशाएं -

पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !

( १९ )   मुख्य ११ अवतार -

मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !

( २० )   बारह मास -

चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !

( २१ )   बारह राशी -

मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
कन्या !

( २२ )   बारह ज्योतिर्लिंग -

सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !

( २३ )   पंद्रह तिथियाँ -

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !

( २४ )   स्मृतियां -

मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !

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ॐ शाति ।।

बारिश के विषय में एक शानदार फार्मूला

कल एक बुजुर्ग ने बारिश के विषय में एक शानदार फार्मूला बताया कि
पुराने समय में जब घर से दूर जाना होता था, तो रास्ते में बारिश होगी या नहीं, यह जानने के लिए -
पहले कुछ दाने चीनी या चावल के 'कीड़ों के घर के पास या किसी पेड़ की "जड़'' में गिराया जाते थे।
अगर कीड़े या चींटियाँ वो दाने उठा कर जमीन पर रेंगते हुए जमीन के नीचे ले जाएँ, तो समझो अभी बारिश नही आएगी, जबकि अगर कीड़े वो दाने उठा कर पेड़ के ऊपर या दीवार के ऊपर की तरफ ले जाते दिखाई दें।
तो समझ लो बारिश के दिन नजदीक हैं, क्योंकि धरती के नीचे सूखे में रहने वाले ये जन्तु बारिश आने से पहले अपना घर बदल लेते हैं, और राशन भी ऊपर की तरफ ले जाते हैं । और ये बात कभी गलत साबित नही होती और आज भी लागू होती है !!🙏🏻🙏🏻🙏🏻

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

एक ही गोत्र में शादी क्यों नहीं..? वैज्ञानिक कारण...

एक दिन डिस्कवरी पर जेनेटिक बीमारियों से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देख रहा था... उस प्रोग्राम में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा कि जेनेटिक बीमारी न हो, इसका एक ही इलाज है और वो है "सेपरेशन ऑफ़ जींस" मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकि नजदीकी रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नहीं हो पाता और जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस और एल्बोनिज्म होने की १००% संभावना होती हैं।

फिर मुझे बहुत ख़ुशी हुई, जब उसी कार्यक्रम में ये दिखाया गया कि आखिर हिन्दूधर्म में हजारों सालों पहले जींस और डीएनए के बारे में कैसे लिखा गया हैं...

उस वैज्ञानिक ने कहा कि आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा की हिन्दूधर्म ही विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो "विज्ञान पर आधारित" हैं।


हिंदुओं में गोत्र का विशेष महत्व है। वेदों के अनुसार मनुष्य जाति विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप और अगस्त्य जैस महान ऋषियों की वशंज हैं।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक ऋषि की अपनी प्रतिष्ठा है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति एक ही गोत्र में शादी करते हैं तो वह एक ही परिवार के माने जाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार एक ही वंश में जन्मे लोगों का विवाह हिंदू धर्म में पाप माना जाता है। ऋषियों के अनुसार ये गौत्र परंपरा का उल्लंघन माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक गोत्र में शादी करने से विवाह दोष लगता है। गोत्र परंपरा का नाता रक्त संबंधों से होता है। ऐसे में एक ही कुल में शादी करने से न सिर्फ होने वाली संतान में शारीरिक दोष बल्कि चरित्र और मानसिक दोष भी हो सकते हैं।

एक ही गोत्र में कई अलग-अलग कुल होते हैं, इसलिए अलग-अलग समुदायों की अपनी परंपराएं हैं। कहीं 4 गोत्र टाले जाते हैं तो किसी वंश में 3 गोत्र टालने का भी नियम है। इससे विवाह में किसी तरह का दोष नहीं लगता है।

परंपराओं के अनुसार पहला गोत्र स्वयं का होता है। दूसरा मां का और तीसरा दादी का गोत्र होता है। कई लोग नानी के गोत्र का भी पालन करते हैं।

बुधवार, 12 जुलाई 2017

मुझे अच्छा लगता हैं, मर्द से मुकाबला ना करना और उससे एक दर्जा कमज़ोर रहना...

मुझे अच्छा लगता हैं, जब कहीं बाहर जाते हुए वह मुझसे कहता है "रुको, मैं तुम्हें ले जाता हूँ या मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ।"
मुझे अच्छा लगता हैं, जब वह मुझसे एक कदम आगे चलता हैं। गैर महफूज़ और खतरनाक रास्ते पर उसके पीछे-पीछे उसके छोड़े हुए क़दमों के निशान पर चलते हुए एहसास होता हैं, उसे मेरा ख्याल खुद से ज्यादा हैं।
मुझे अच्छा लगता हैं, जब गहराई से ऊपर चढ़ते और ऊंचाई से ढलान की तरफ जाते हुए वह मुड़-मुड़ कर मुझे चढ़ने और उतरने में मदद देने के लिए बार-बार अपना हाथ बढ़ाता हैं।
मुझे अच्छा लगता हैं, जब किसी सफर पर जाते और वापस आते हुए सामान का सारा बोझ वह अपने दोनों कंधों और सर पर बिना हिचक किये खुद ही बढ़ कर उठा लेता है और अक्सर वज़नी चीजों को दूसरी जगह रखते वक़्त उसका यह कहना कि "तुम छोड़ दो, यह मेरा काम है।"
मुझे अच्छा लगता हैं, जब वह मेरी वजह से सर्द मौसम में सवारी गाड़ी का इंतज़ार करने के लिए खुद स्टेशन पे इंतजार  करता हैं।

मुझे अच्छा लगता हैं, जब वह मुझे ज़रूरत की हर चीज़ घर पर ही मुहैय्या कर देता है ताकि मुझे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ बाहर जाने की दिक़्क़त ना उठानी पड़े और लोगों के नामुनासिब रावैय्यों का सामना ना करना पड़े..!
मुझे बहोत अच्छा लगता हैं, जब रात की खनकी में मेरे साथ आसमान पर तारे गिनते हुए वह मुझे ठंड लग जाने के डर से अपना कोट उतार कर मेरे कन्धों पर डाल देता हैं।
मुझे अच्छा लगता हैं, जब वह मुझे मेरे सारे गम आंसुओं में बहाने के लिए अपना मज़बूत कंधा पेश करता है और हर कदम पर अपने साथ होने का यकीन दिलाता हैं।
मुझे अच्छा लगता हैं, जब वह खराब हालात में मुझे अपनी जिम्मेदारी मान कर सहारा देने के लिए मेरे आगे ढाल की तरह खड़ा हो जाता है और कहता है "डरो मत, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा"
मुझे अच्छा लगता हैं, जब वह मुझे गैर नज़रों से महफूज़ रहने के लिए समझाया करता है और अपना हक जताते हुए कहता है कि "तुम सिर्फ मेरी हो"


लेकिन अफसोस हम में से अक्सर लड़कियां इन तमाम खुशगवार अहसास को महज मर्द से बराबरी का मुकाबला करने की वजह से खो देती हैं...
फिर۔۔۔۔
जब मर्द यह मान लेता है कि औरत उस से कम नहीं, तब वह उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाना छोड़ देता हैं। तब ऐसे खूबसूरत लम्हात एक-एक करके ज़िन्दगी से कम होते चले जाते हैं और फिर ज़िन्दगी बेरंग और बेमतलब होकर, अपनी खुशियां खो देती हैं।
मुक़ाबला आधुनिकता की इस दौड़ से निकल कर अपनी ज़िंदगी के ऐसे हसीन लम्हों का अहसास कर लीजिए...

प्याज के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी - अवश्य पढ़े*

मानो या ना मानो यह पूर्णतया सत्य है। देर से कटी प्याज का कभी उपयोग ना करें। प्याज हमेशा तुरंत काट कर खाएं। कटी रखी प्याज दस मिनिट में अपने आस पास के सारे कीटाणु अवसोशित कर लेती है। यह वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है। जब भी किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप फैले घर में सुबह शाम हर कमरें में प्याज काट कर रख दें। बाद में उसे फैंक दें।सुरक्षित बने रहेंगें।

*"प्याज "के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी -अवश्य पढ़े*

सन 1919 में फ्लू से चार करोड़ लोग मारे जा चुके थे तब एक डॉक्टर कई किसानों से उनके घर इस प्रत्याशा में मिला कि वो कैसे इन किसानों को इस महामारी से लड़ने में सहायता कर सकता है। बहुत सारे किसान इस फ्लू से ग्रसित थे और उनमें से बहुत से मारे जा चुके थे।
डॉक्टर जब इनमें से एक किसान के संपर्क में आया तो उसे ये जान कर बहुत आश्चर्य हुआ जब उसे ये ज्ञात हुआ कि सारे गाँव के फ्लू से ग्रसितहोने के बावजूद ये किसान परिवार बिलकुल  बिलकुल स्वस्थ्य था तब डॉक्टर को ये जानने की इच्छा जाएगी कि ऐसा इस किसान परिवार ने सारे गाँव से हटकर क्या किया कि वो *इस भंयकर महामारी में भी स्वस्थ्य थे। तब किसान की पत्नी ने उन्हें बताया कि उसने अपने मकान के दोनों कमरों में एक प्लेट में बिना छिली प्याज रख दी थी तब डॉक्टर ने प्लेट में रखी इन प्याज को माइक्रोस्कोप से देखा तो उसे इस प्याज में उस घातक फ्लू के बैक्टेरिया मिले जो संभवतया इन प्याज द्वारा अवशोषित कर लिए गए थे और शायद यही कारण था कि इतनी बड़ी महामारी में ये परिवार बिलकुल स्वस्थ्य क्योंकि फ्लू के वायरस इन प्याज द्वारा सोख लिए गए थे।*
जब मैंने अपने एक मित्र जो अमेरिका में रहते थे और मुझे हमेशा स्वास्थ्य संबधी मुद्दों पर  बेहद ज्ञानवर्धक जानकारी भेजते रहते हैं तब उन्होंने प्याज के संबध में बेहद महत्वपूर्ण जानकारी/अनुभव मुझे भेजा । उनकी इस बेहद रोचक कहानी के लिए धन्यवाद। क्योंकि मुझे इस  किसान वाली कहानी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
*जब मैं न्यूमोनिया से ग्रसित था और कहने की आवश्यकता नहीं थी कि मैं बहुत कमज़ोर महसूस कर रहा था तब मैंने एक लेख पढ़ा था जिसमें ये बताया गया था कि प्याज को बीच से काटकर रात में  न्यूमोनिया से ग्रस्त मरीज़ के कमरे में एक जार में रख दिया गया था और सुबह यह देख कर बेहद आश्चर्य हुआ कि प्याज सुबह कीटाणुओं की वज़ह से  बिलकुल काली हो गई थी*
*तब मैंने भी अपने कमरे में वैसे ही किया और देखा अगले दिन प्याज बिलकुल काली होकर खराब हो चुकी थी और मैं काफी स्वस्थ्य महसूस कर रहा था।*

कई बार हम पेट की बीमारी से दो चार होते है तब हम इस बात से अनजान रहते है कि इस बीमारी के लिए किसे दोषी ठहराया जाए। तब नि :संदेह प्याज को इस बीमारी के लिए दोषी ठहराया जा सकता है ,
*प्याज बैक्टेरिया को अवशोषित कर लेती है यही कारण है कि अपने इस गुण के कारण प्याज हमें ठण्ड और फ्लू से बचाती है*
*अत :वे प्याज बिलकुल नहीं खाना चाहिए जो बहुत देर पहल काटी गई हो और प्लेट में रखी गई हों। ये जान लें कि "काट कर रखी गई प्याज बहुत विषाक्त होती हैं "*

जब कभी भी फ़ूड पॉइसनिंग के केस अस्पताल में आते हैं तो सबसे पहले इस बात की जानकारी ली जाती कि मरीज़ ने अंतिम बार प्याज कब खाई थी. और वे प्याज कहाँ से आई थीं ,(खासकर सलाद में )
*तब इस बीमारी के लिए या तो प्याज दोषी हैं या काफी देर पहले कटे हुए "आलू "*
*प्याज बैक्टेरिया के लिए "चुंबक "की तरह काम करती  हैं खासकर कच्ची प्याज।*

*आप कभी भी थोड़ी सी भी  कटी हुई प्याज को देर तक रखने की गलती न करे ये बेहद खतरनाक हैं*
*यहाँ तक कि किसी बंद थैली में इसे रेफ्रिजरेटर में रखना भी  सुरक्षित नहीं है।*
प्याज ज़रा सी काट देने पर ये बैक्टेरिया से ग्रसित हो सकती है औए आपके लिए खतरनाक हो सकती है। यदि आप कटी हुई प्याज को सब्ज़ी बनाने के लिए उपयोग कर रहें हो तब तो ये ठीक है मगर यदि आप कटी हुई प्याज अपनी ब्रेड पर रख कर खा रहें है तो ये बेहद खतरनाक है ऐसी स्थिति में आप मुसीबत को न्योता दे रहें हैं। याद रखे कटी हुई प्याज और कटे हुए आलू की नमी बैक्टेरिया को तेज़ी से  पनपने में बेहद सहायक होता है। कुत्तों  को  कभी भी प्याज नहीं खिलाना चाहिए  क्योंकि प्याज को  उनका पेट का मेटाबोलिज़ कभी भी   नहीं पचाता। -

*कृपया ध्यान रखे कि "प्याज को काट कर अगले दिन सब्ज़ी बनाने के लिए नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये बहुत खतरनाक है यहाँ तक कि कटी हुई प्याज एक रात में बहुत विषाक्त हो जाती है क्योंकि ये टॉक्सिक बैक्टेरिया बनाती है जो पेट खराब करने के लिए पर्याप्त रहता है "*

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मंगलवार, 11 जुलाई 2017

'मोदी! ये हिंदुस्तान तेरे बाप का नहीं' छोटे ओवैसी के इस सांस्कारिक बयान पर मेरी संस्कार पूर्ण कविता...


नुक्कड़ गली मकान हमारे अब्बा का,
है पूरा मैदान हमारे अब्बा का,

जिस पर तुम गुलकंद,सुपाड़ी रखते हो,
है वो पत्ता-पान हमारे अब्बा का,

बूचड़खाने चाकू छुरी तुम्हारी हैं,
खेत और खलिहान हमारे अब्बा का,

दुनिया से अनुलोम विलोम कराते हैं,
है योगा का ज्ञान हमारे अब्बा का,

चीख चीख के माइक पर मर जाओगे,
कायम है तूफ़ान हमारे अब्बा का,

रिंच,हथौड़ी,पाना,टिकरी,पम्प,हवा,
पंचर का सामान हमारे अब्बा का,

अम्मी,खाला,फुफ्फी,आपा,आजी क्या,
तेरा अब्बा जान,हमारे अब्बा का,

धर्म बदलने से पुरखे कब बदले हैं,
हर शहरुख सलमान हमारे अब्बा का,

मस्जिद,ईद,नमाज़,मदरसे या रोज़े,
सब पर है अहसान हमारे अब्बा का,

"गौरव" कहे कटेगी नाक तुम्हारी भी,
जो पकड़ोगे कान हमारे अब्बा का

भारत के गद्दारों!फिर से कहता हूँ,
हाँ,है हिंदुस्तान,हमारे अब्बा का,
--------कवि गौरव चौहान(ओवैसी के सम्मान में बिना कांट छांट के खूब शेयर करें)

क्रोधित हूँ अमरनाथ में कांवड़ियों की हत्या पर, क्रोध आया तो कविता आयी, पढ़ें...

फिर से वही रवैया अपना,फिर वो ही लाचारी है
अमरनाथ के आंगन में जेहादी गोलीबारी है,

हिन्दू सात मारकर लश्कर,जश्न मनाता कायम है,
और सूरमा मोदी का दिल अब तक बहुत मुलायम है,

अमरीका इजराइल में बस जुमलों  के बम फोड़े हैं,
और यहाँ मोदी,मुफ़्ती का दामन सर पर ओढ़े हैं,

दीमक शायद लग बैठी,दिल्ली की सख्त जवानी को,
शर्म आज आती होगी इन पर बाबा बर्फानी को,

जिस काशी के भोले बाबा की मोदी पर कृपा हुयी,
विजय दिलायी,कुर्सी सौंपी,हर मुश्किल भी दफा हुयी,

बहुमत का वरदान मिला,जनता के मिले सहारे थे,
विश्वनाथ से सोमनाथ तक बम भोले के नारे थे,

लेकिन दुःख इस बात का है,यह हमला आंसू छोड़ गया,
अमरनाथ तक आते आते यह नारा दम तोड़ गया,

कांवड़ियों को मार,हमें अंजाम सुना कर चले गए,
हम काफ़िर हैं मरने को,पैगाम सुना कर चले गए,

आतंकी कुनबे मज़हब की जात दिखाकर चले गए,
सच तो ये है भारत की औकात दिखा कर चले गए,

वो तो चले गए,हम अपनी ज़िंदा लाश घसीटेंगे,
इक जुनैद के मरने पर हम केवल छाती पीटेंगे,

दिल्ली से निंदा की तोपें,रोज चलायी जाएँगी,
और मीटिंगे मंत्रालय की रोज़ बुलाई जाएंगी,

ऐसी मौतों पर खुद को बेशर्म बनाये रखेंगे,
मज़हब वाली दहशत पर,रुख नर्म बनायें रखेंगे,

देख नही पाये मंसूबे,हम उठती आवाज़ों में,
आतंकी कितने शामिल हैं आखिर पत्थरबाजों में,

कांग्रेस का नेता बुराहनों का पानी भरता है,
पैलेट गन चल जाए तो न्यायालय मातम करता है,

भारत मरता सदा रहेगा,गद्दारी अरमानों से,
कैसे जंग लड़ी जायेगी आतंकी फरमानों से,

कैसे क़र्ज़ उतारोगे,सेना के खून पसीने का,
जनता क्या अचार रक्खेगी,छप्पन इंची सीने का,

खुल कर मोदी वार करो अब,ना कोई परवाह करो,
अमरनाथ में यज्ञ करो,हर आतंकी को स्वाह करो,

काश्मीर के घर घर में घुसती सेना की टोली हो,
जिसके हाथ दिखे पत्थर,उसके सीने में गोली हो,

पहले ढूंड ढूंड मारो,घर छिपे हुए गद्दारों को,
केरल से बंगाल तलक,जेहादी राजदुलारों को,

भक्त मरे,सेना मरती,अब कितनी और परीक्षा है,
और बताओ किसके मरने की अब तुम्हे प्रतीक्षा है,

अमरनाथ की चीख सुनो,वर्ना आगे पछताओगे,
सोमनाथ के अंश नही,कायर का वंश कहाओगे,

कवि गौरव की कविता तुमको ना कोई आलाप लगे,
इससे पहले शिवभक्तों का तुम परB कोई श्राप लगे,

अब त्रिशूल घुस जाने दो,दहशतगर्दों की छाती में,
बम बम भोले होने दो,अब की लाहौर कराची में,

📝कवि:- गौरव चौहान 
✍प्रेषक:- कमल सिंघल