मंगलवार, 17 जुलाई 2018

क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान शब्द का जनक जन्म से एक कश्मीरी ब्राह्मण था...

"पाकिस्तान" शब्द का जनक सियालकोट का रहनेवाला 'मुहम्मद इकबाल' था।

जो कि जन्म से एक कश्मीरी ब्राह्मण था परन्तु बाद में मुसलमान बन गया था। ये वही मुहम्मद इकबाल है, जिसने प्रसिद्ध गीत "सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा" लिखा हैं।

इसी इकबाल ने अपने गीत में एक जगह लिखा है कि "मजहब नहीं सिखाता... आपस में बैर रखना"

परन्तु इसी इकबाल ने अपनी एक किताब "कुल्लियाते इकबाल" में अपने बारे में लिखा है...

"मिरा बिनिगर कि दरहिन्दोस्तां दीगर नमी बीनी, बिरहमनजादए रम्ज आशनाए रूम औ तबरेज अस्त"
अर्थात
मुझे देखो... मेरे जैसा हिंदुस्तान में दूसरा कोई नहीं होगा..! क्योंकि मैं एक ब्राह्मण की औलाद हूँ। लेकिन मौलाना रूम और मौलाना तबरेज से प्रभावित होकर मुसलमान बन गया..!

कालांतर में यही इकबाल... मुस्लिम लीग का अध्यक्ष बन गया और हैरत कि बात हैं कि जो इकबाल "सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा" लिखा और "मजहब नहीं सिखाता... आपस में बैर रखना" जैसे बोल बोले थे, उसी इकबाल ने... मुस्लिम लीग खिलाफत मूवमेंट के समय... 1930 के इलाहाबाद में मुस्लिमलीग के सम्मलेन में कहा था... "हो जाये अगर शाहे खुरासां का इशारा, सिजदा न करूं हिन्दोस्तां की नापाक जमीं पर... 

यानि

यदि तुर्की का खलीफा अब्दुल हमीद (जिसको अँगरेजों ने 1920 में गद्दी से उतार दिया था) इशारा कर दे... तो मैं इस "नापाक हिंदुस्तान" पर नमाज भी नहीं पढूंगा। बादमें... इसी "नापाक" शब्द का विपरीत शब्द लेकर "पाक" से "पाकिस्तान" बनाया गया...

जिसका शाब्दिक अर्थ हैं... (मुस्लिमों के लिए) पवित्र देश..!

कहने का तात्पर्य ये है कि हिन्दू बहुल क्षेत्र होने के कारण... मुस्लिमों को हिंदुस्तान "नापाक" लगता था... इसीलिए मुस्लिमों ने अपने लिए तथाकथित पवित्र देश "पाकिस्तान" बनवा लिया।

अब इस सारी कहानी में... समझने की बात यह है कि जब एक कश्मीरी ब्राह्मण के धर्म परिवर्तन करने के बाद... अपने देश और अपनी मातृभूमि के बारे में सोच... इतनी जहरीली हो सकती है... तो आज हिन्दुओं की अज्ञानता और उदासीनता का लाभ उठा कर... जकारिया नाईक जैसे.... समाज के दुश्मनों द्वारा हजारों-लाखों हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है... उसका परिणाम कितना भयानक हो सकता हैं।

ऐसे में मुझे एक मौलाना की वो प्रसिद्द उक्ति याद आ रही है... जिसमे उसने कहा था कि देखिये हमारे तो इतने इस्लामी देश हैं, इसीलिए अगर हमारे लिए जमीन तंग हो जाएगी तो हम किसी भी देश में जाकर कहेंगे "अस्सलामु अलैकुम" और वह कहेगा "वालेकुम अस्सलाम" साथ ही हमें भाई समझ कर अपना लेगा, लेकिन मैं हिन्दुओं से एक मासूम-सा सवाल पूछना चाहता हूँ कि उनके राम-राम का जवाब देने वाला कौन-सा देश है..?

इसलिए जो यह लेख पढ़ रहे हैं, उन सभी हिन्दू भाइयों-बहनों से निवेदन है कि जकारिया नायक जैसे क्षद्मजिहादी और इस्लाम का पर्दाफाश करने में हर प्रकार का सहयोग करें...

याद रखें कि अगर धर्म नहीं रहेगा तो देश भी नहीं रहेगा। क्योंकि देश और धर्म का अटूट सम्बन्ध हैं... जिस तरह धर्म के लिए देश की जरुरत होती हैं... ठीक उसी तरह देश की एकता के लिए भी धर्म की जरूरत होती हैं।

इसीलिए अगर हमारे हिन्दुस्थान को बचाना हैं तो जाति और क्षेत्रवाद का भेद भूलकर... कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और कच्छ से लेकर असम तक के सारे हिन्दुओं को एक होना ही होगा।

जय हिंदुत्व... जय हिन्दुराष्ट्र...

✊🏻 जय जय श्री राम 🚩

शनिवार, 14 जुलाई 2018

क्या हमारा #पहनावा सामने वाले #व्यवहार को प्रभावित करता है..?

बहुत से बुद्धिजीवियों को आपने यह कहता सुना होगा कि कपड़े कोई मायने नहीं रखते हैं... खासकर तब जब चर्चा का विषय महिलाओं से छेड़छाड़/बलात्कार का हो... लेकिन यह सरासर झूठ है... कपड़े ही व्यक्ति की विचारधारा एवं व्यक्तित्व को दर्शाते हैं... शायद कई लोगों को मेरी बात कड़वी एवं गलत लगे लेकिन यह सत्य है कि छेड़छाड़ एवं बलात्कार में कपड़े एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं...
अब इस विषय को थोड़ा घुमाते हैं... छेड़छाड़ केवल लड़कियों से ही नहीं की जाती... हर बार केवल लड़के ही किसी लड़की को फोन करके तंग नहीं करते... हर बार फेसबुक पर केवल लड़के ही  लड़कियों को  फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं भेजते... हर बार प्रपोज लड़के ही नहीं करते... ये सब हरकते लड़कियों द्वारा भी की जाती हैं... और यह सब करने का जोखिम हम तभी उठाते हैं, जब हमें सामने कुछ संभावना नजर आएं...
अब मैं मेरे निजी जीवन के माध्यम से आपको समझाता हूं... मैंने अपने जीवन में कभी किसी को प्रपोज नहीं किया... मुझे बहुत बार बिना किसी जान पहचान के लड़कियों के फोन मित्रता बढ़ाने हेतु आएं... कई बार लड़कियों द्वारा प्रेम प्रस्ताव मिला... कई लड़कियों ने मुझसे डबल मीनिंग में बात की... बहुत सी लड़कियों के Facebook पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, उसके बाद मैसेंजर पर बातें हुई... इस तरह की काफी घटनाएं है और यह सब तब की हैं, जब मैं कहीं ना कहीं इन सब के लिए तैयार था... जब से मैंने सादा जीवन जीना शुरु किया, कुर्ते-पजामे पहनने शुरू किये, Facebook को भी आध्यात्मिक एवं देश भक्ति भावनाओं को साझा करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया तब से इन सभी घटनाओं पर पूर्ण विराम लग गया...
मेरे पहनावे को देख कर किसी लड़की के मन में इस तरह की भावना नहीं आती, कारण उसे लगता है कि यह इस तरह का लड़का नहीं हैं...
मैं इस पोस्ट से केवल यही समझाना चाहता हूं... मेरे कहने का केवल इतना-सा भाव है कि अगर मेरे 'लड़का' होने के बावजूद भी... मेर पहनावे के कारण लड़कियों के व्यवहार में परिवर्तन आता है तो लड़कियों के पहनावे से लड़कों के व्यवहार/मानसिकता में परिवर्तन आना स्वभाविक हैं...
इसलिए पहनावा सुंदर डालिए लेकिन सभ्य डालिए... आपके कपड़े ऐसे हो जिसे डालने के बाद आप सुंदर लगे, ना कि असभ्य/उत्तेजित... कपड़ों का आविष्कार बदन को ढकने के लिए किया गया था, दिखाने के लिए नहीं... बच्चों के माता-पिता से अनुरोध बच्चों के द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों का आंकलन कीजिए... उनकी T-Shirt  पर लिखी जाने वाली wording पर ध्यान दीजिए...
यकीन मानिए सभ्य कपड़ो में एक सुंदर लड़की को देखकर कोई भी लड़का उससे शादी करने की तो सोच सकता है लेकिन उसके मन में कोई गलत विचार नहीं आएगा और इसके विपरीत असभ्य कपड़ों में लड़की को देख कर कोई भी लड़का कुछ गलत करने की तो सोच सकता है लेकिन कभी भी उससे शादी करने की नहीं सोचेगा...
मेरे द्वारा लिखी गई इस पोस्ट में की गई गलतियों के लिए क्षमा🙏 आप सब से अनुरोध कृपया इस लेख के शब्दों को नहीं भावनाओं को पढ़ें...

✍🏻 कमल सिंघल🙏🏻
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शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

किसी इंसान कानखजूरा काट लेता है या कान में घुस जाता है तो क्या करना चाहिए? एक बार जरुर जान लें :-

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है और जैसा की हम सभी जानते हैं इस मौसम में कीडे मकौड़े बाहर आते हैं। इसमें सबसे खतरनाक कनखूजरे को माना जाता है। कनखूजरे के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं होती। इसलिए अगर किसी को कनखूजरा काटता है तो मालूम नहीं होता की क्या करना चाहिए। इसलिए आज हम आपको बताएंगे की कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करना चाहिए। अमूमन देखा जाता है कि लोगों को जब कनखजूरा काट लेता है तो समझ में नहीं आता है कि क्या करना चाहिए। तो आइये आपको बता देते हैं कि कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करना चाहिए।

कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करें?

आपको बता दें कि कनखजूरा सांप की तरह ही जहरीला जानवर माना जाता है। कनखजूरा सांप की तरह ही काटने के बाद शरीर में जहर छोड़ता है। कनखजूरा के काटने पर इंसान को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। सांस में तकलीफ के अलावा शरीर में काफी दर्द भी होता है। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी की कनखजूरा का काटना जानलेवा नहीं होता है। लेकिन, इस के काटने पर होने वाला दर्द कभी कभी काफी अधिक होता है जो कभी कभी बर्दास्त के बाहर हो जाता है।

लेकिन, अक्सर देखा जाता है कि कनखजूरा काटने के अलावा कान के रास्ते अंदर घुस जाता है। यह बेहद खतरनाक माना जाता है। दरअसल, कनखजूरा अक्सर अंधेरे में रहता है और इसी वजह से वह अक्सर कान में घुस जाता है। इसके अलावा, बरसात के मौसम में भी कनखजूरा बहुत निकलते हैं। कनखजूरे का कानों घुसना काफी दर्दनाक होता है। कनखजूरा इंसान के कान में चिपक जाता है जिसे निकालना काफी मुश्किल होता है। कनखजूरा के काटने पर उसका जहर शरीर में पहुंच जाता है और थकान के साथ साथ सांस लेने में तकलीफ होती है।

कनखजूरे काटने का इलाज और तरीका

आपको बता दें कि कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करना चाहिए। आज हम आपको बता देते हैं कि कनखजूरे काटने का इलाज और तरीका क्या है। अगर किसी के कान में कनखजूरा घुस जाए तो पानी में सेंधा नमक मिलाकर कान में डालने से वह मर जाता है। सेंधा नमक की वजह से वह मरकर कान से बाहर निकल जाता है। इसके अलावा, अगर कनखजूरा शरीर से चिपक जाए तो उसके मुंह पर चीनी डालने से वह शरीर को छोड़ देता है। इसी तरह अगर किसी को कनखजूरा काट ले तो हल्दी और सेंधा नमक का मिश्रण लेकर इसे गाय के घी में वहां पर लगाये।

ऐसा करने से कनखजूरा का विष खत्म हो जाता है। ये वो तरीके हैं जिनसे कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर इलाज किया जा सकता है। अगर आपके आस पास या घर में किसी को कनखजूरा के काट ले या कान में घुसने जाये तो ये उपाय करके उसे ठीक किया जा सकता है। आपको बता दें की कनखजूरा अगर इंसान को काटे तो यह जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसके काटने के बाद अगर सही उपचार नहीं हुआ तो इंसान के लिए यह जानलेवा हो सकता है। लेकिन, अगर यह चूहों को काट ले तो 30 सेकंड में उसकी मौत हो जाती है।

रविवार, 1 जुलाई 2018

बिना थर्मामीटर के तापमान की जानकारी और आयु के अनुसार रक्‍तचाप :

किसी भी व्यक्ति का शरीर का तापमान की जानकारी लेना हो बिना किसी भी थर्मामीटर या किसी भी अन्य यंत्र के तो नीचे लिखे तरीके से जानकारी ले सकते है ।
पुरुष की नाड़ी परीक्षण हमेशा दाहिनी हाथ से किया जाता है और महिला की बायी हाथ से।

अगर किस भी व्यक्ति का शरीर का :
60-65 पल्स है तो शरीर का तापमान 98 डिग्री फ़रेनहाएट
70 पल्स है तो 99 डिग्री फ़रेनहाएट तापमान
80 पल्स है तो 100 डिग्री तापमान
90 पल्स = 101 डिग्री फ़रेनहाएट
100 पल्स = 102 डिग्री फ़रेनहाएट
110 पल्स = 103 डिग्री फ़रेनहाएट
120 पल्स = 104 डिग्री फ़रेनहाएट
130 पल्स = 105 डिग्री फ़रेनहाएट
140 पल्स = 106 डिग्री फ़रेनहाएट
यानि हर 10 स्पंदन बढ़ने पर 1 डिग्री तापमान शरीर का बढ़ेगा गर्भ में बच्चा का पल्स 140 से 150 होगा
सबसे अच्छा पल्स 70 से 74 के बीच होना चाहिए ।

आयु के अनुसार रक्‍तचाप (Blood Pressure) नापने का अद्भुत तरीका।
गर्भ में बच्चा का बी पी माँ के बी पी के बराबर होगा

जन्म से 5 साल तक बी पी का हाईयर लिमिट 81 और लोअर लिमिट 45
5 साल से 10 साल तक बी पी का हाईयर लिमिट 90 और लोअर 50
10 साल से 15 साल तक हाई 100 और लोअर 62
15 साल से 20 साल तक हाई बी पी 110 और लोअर बी पी 71
20 साल से 30 साल तक हाई बी पी 120 और लोअर बी पी 80
30 साल से 35 साल तक हाई बी पी 124 और लोअर बी पी 82
35 साल से 40 साल तक हाई बी पी 126 और लोअर बी पी 83
40 साल से 50 साल तक हाई बी पी 128 और लोअर बी पी 84
50 साल से 60 साल तक हाई बी पी 132 और लोअर बी पी 86
60 साल से 65 साल तक हाई बी पी 136 और लोअर बी पी 88
65 साल से 80 साल तक हाई बी पी 140 और लोअर बी पी 90
80 साल से ऊपर तक हाई बी पी 145 और लोअर बी पी 92
किसी किसी का बी पी में + 5 या – 5 का अंतर हो सकता है तो किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी । उस से ज्यादा अंतर आने पर व्यक्ति बीमार कहलाएगा

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बुधवार, 27 जून 2018

पीर

आपने भी हरी चादर लेकर घूमते कुछ दाढ़ी वालों को देखा होगा या बहुत लोग पीर की पूजा करने जाते भी होंगे।

आखिर क्या है पीर..? आइए जानते हैं...

मुस्लिम राजा का यह एक अधिकारी होता था, जिसे पीर कहा जाता था। जिसकी नौ गज के घेरे तक सुरक्षा रहती थी, जैसे आजकल सुरक्षा कमांडो मुख्यमंत्री को घेरा बनाकर चलते हैं। गावों में लगान आदि इकट्टा करने का जिम्मा पीर का होता था। रैवैन्यु गांव के एक निश्चित स्थान पर सभी लोग उस पीर के पास जाकर मुगलों का टैक्स देते थे!। वो टैक्स केवल हिंदूओं पर ही था जिसको जजिया कर भी कहते थे।
जो हिन्दू परिवार वह जजिया कर देने से मना कर देता था, तो उस पीर के साथ नौ गज के घेरे में रहने वाले सुरक्षा कर्मी गांव में सबके सामने, उस जजिया कर न चुकाने वाले परिवार की सबसे सुंदर बहु या बेटी को नंगा करके लाते थे व सबके सामने उसके साथ बलात्कार किया जाता था। ताकि किसी की हिम्मत ना पड़े बाद में जजिया कर देने से मना करने की... सबके सामने हो रहे, इस घिनौने बलात्कार के समय कुछ लोग उस बहु बेटी के उपर चादर डाल देते थे व गांव के बाकी लोग डर के मारे लगान व जजिया कर (पैसा) उसी चादर के ऊपर या उसके पास धड़ाधड़ डालते चले जाते थे।
और हाथ जोड़ लेते थे, सिर झुकाते थे कि कहीं उनके ऊपर भी पीर या उसके नौ गज के घेरे वाले सुरक्षा देने वाले मुल्ले कोई अत्याचार ना करें।
यह है उन पीरों की सच्चाई... जब वह दुष्ट नीच पीर मरे थे, तब भी मूर्ख अज्ञानी हिंदुओ में उनके प्रति वही घबराहट व भयंकर खौफ बना रहा और फिर यह पीढ़ी दर पीढी परम्परा लोगों के दिमाग में बैठ गई। ऐसे राक्षस पीरों के मरने के सदियों बाद भी मूर्ख हिंदु डर के मारे उनकी कब्रों पर वही चादर व पैसा चढ़ाता हैै‌ अर्थात जिस-जिस नीच पीर ने मूर्ख हिंदुओं की बहन-बेटियों की इज्जत लूटी, यह मूर्ख उनकी ही कब्रों (पीरो) पर माथा रगड़ता फिरते है। कहीं नौकरी मांगता फिरता है, तो कहीं पुत्र और धन दौलत व व्यापार या तरक्की के लिए माथा रगड़ता है।

क्या इससे अधिक कायरता व मूर्खता की मिसाल दुनियां में कहीं मिल सकती है..!

सोमवार, 25 जून 2018

शिवलिंग का अर्थ

शिवलिंग को गुप्तांग की संज्ञा कैसे दी और अब हम  हिन्दू खुद शिवलिंग को शिव् भगवान का गुप्तांग समझने लगे हे और दूसरे हिन्दुओ को भी ये गलत जानकारी देने लगे हे।

प्रकृति से शिवलिंग का क्या संबंध है ..?
जाने शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है और कैसे इसका गलत अर्थ निकालकर हिन्दुओं को भ्रमित किया...??

कुछ लोग शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते हैं..।
छोटे छोटे बच्चों को बताते हैं कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा करते हैं । मूर्खों को संस्कृत का ज्ञान नहीं होता है.. और अपने छोटे-छोटे बच्चों को हिन्दुओं के प्रति नफ़रत पैदा करके उनको आतंकी बना देते हैं। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है । इसे देववाणी भी कहा जाता है।

*लिंग*
लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह, प्रतीक होता है…
जबकी जनर्नेद्रीय को संस्कृत मे शिशिन कहा जाता है।

*शिवलिंग*
>शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक….

>पुरुषलिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक इसी प्रकार स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक और नपुंसकलिंग का अर्थ हुआ नपुंसक का प्रतीक। अब यदि जो लोग पुरुष लिंग को मनुष्य की जनेन्द्रिय समझ कर आलोचना करते है..तो वे बताये ”स्त्री लिंग ”’के अर्थ के अनुसार स्त्री का लिंग होना चाहिए ।

*शिवलिंग”’क्या है ?*

शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है । स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है।शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है।
शिव लिंग का अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है और ना ही शुरुआत।

शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता ।

दरअसल यह गलतफहमी भाषा के रूपांतरण और मलेच्छों यवनों  के द्वारा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने पर तथा बाद में षडयंत्रकारी अंग्रेजों के द्वारा इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ है ।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एक ही शब्द के विभिन्न भाषाओँ में अलग-अलग अर्थ निकलते हैं ।
उदाहरण के लिए
यदि हम हिंदी के एक शब्द “सूत्र” को ही ले लें तो
सूत्र का मतलब डोरी/धागा गणितीय सूत्र कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता है। जैसे कि नासदीय सूत्र ब्रह्म सूत्र इत्यादि । उसी प्रकार “अर्थ” शब्द का भावार्थ : सम्पति भी हो सकता है और मतलब (मीनिंग) भी ।
ठीक बिल्कुल उसी प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से अभिप्राय चिह्न, निशानी, गुण, व्यवहार या प्रतीक है । धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है।तथा कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है। जैसे : प्रकाश स्तंभ/लिंग, अग्नि स्तंभ/लिंग, उर्जा स्तंभ/लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ/लिंग (cosmic pillar/lingam)

ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे हैं: ऊर्जा और प्रदार्थ। हमारा शरीर प्रदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है।
इसी प्रकार शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते हैं।

ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा ऊर्जा शिवलिंग में निहित है। वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है.

The universe is a sign of Shiva Lingam

शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है तथा पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतिक भी है। अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों सामान हैं।

*अब बात करते है योनि शब्द पर-*
मनुष्ययोनि ”पशुयोनी”पेड़-पौधों की योनी’जीव-जंतु योनि,,, योनि का संस्कृत में प्रादुर्भाव ,प्रकटीकरण अर्थ होता है... जीव अपने कर्म के अनुसार विभिन्न योनियों में जन्म लेता है। किन्तु कुछ धर्मों में पुर्जन्म की मान्यता नहीं है नासमझ बेचारे। इसीलिए योनि शब्द के संस्कृत अर्थ को नहीं जानते हैं। जबकी हिंदू धर्म मे 84 लाख योनि बताई जाती है। यानी 84 लाख प्रकार के जन्म हैं। अब तो वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि धरती में 84 लाख प्रकार के जीव (पेड़, कीट,जानवर,मनुष्य आदि) है।

*मनुष्य योनि*
पुरुष और स्त्री दोनों को मिलाकर मनुष्य योनि होता है।अकेले स्त्री या अकेले पुरुष के लिए मनुष्य योनि शब्द का प्रयोग संस्कृत में नहीं होता है। तो कुल मिलकर अर्थ यह है:-

लिंग का तात्पर्य प्रतीक से है शिवलिंग का मतलब है पवित्रता का प्रतीक ।

दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इस की शुरुआत हुई , बहुत से हठ योगी दीपशिखा पर ध्यान लगाते हैं । हवा में दीपक की ज्योति टिमटिमा जाती है और स्थिर ध्यान लगाने की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करती है। इसलिए दीपक की प्रतिमा स्वरूप शिवलिंग का निर्माण किया गया। ताकि निर्विघ्न एकाग्र होकर ध्यान लग सके । लेकिन कुछ विकृत मुग़ल काल व गंदी मानसिकता बाले गोरे अंग्रेजों के गंदे दिमागों ने इस में गुप्तांगो की कल्पना कर ली और झूठी कुत्सित कहानियां बना ली और इसके पीछे के रहस्य की जानकारी न होने के कारण अनभिज्ञ भोले हिन्दुओं को भ्रमित किया गया ।

आज भी बहुतायत हिन्दू इस दिव्य ज्ञान से अनभिज्ञ है।
हिन्दू सनातन धर्म व उसके त्यौहार विज्ञान पर आधारित है, जोकि हमारे पूर्वजों ,संतों ,ऋषियों-मुनियों तपस्वीयों की देन है। आज विज्ञान भी हमारी हिन्दू संस्कृति की अदभुत हिन्दू संस्कृति व इसके रहस्यों को सराहनीय दृष्टि से देखता है व उसके ऊपर रिसर्च कर रहा है।

🙏ॐ नमः शिवाय 🚩

शुक्रवार, 25 मई 2018

संस्कृत का महत्व जानना चाहते हैं तो पढ़ें उससे जुड़े कुछ मुख्य तथ्य...

संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा। आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं, जो किसी भी भारतीय का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे...

1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है।

2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा है।

3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी।

4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है।

5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है। वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है।

6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक अद्भुत खजाना है। जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द है।

7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन पर नासा रिसर्च कर रहा है।

8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में संस्कृत को Computer Software के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था।

9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दों में वाक्य पूरा हो जाता है।

10. संस्कृत ही अकेली ऐसी भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है।

11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो जायेगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश (Positive Charges) के साथ सक्रिय हो जाता है।

12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार है यह एकाग्रता को बढ़ाती है।

13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते है।

14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था, जो 1970 में शुरू हुआ था। आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है।

15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो की मांग है। जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे तो उनके वाक्य उलट हो जाते थे। इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल जाता था। उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया लेकिन हर बार यही समस्या आई। आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे हो जाने पर भी अपना अर्थ नहीं बदलते हैं। जैसे

अहम् विद्यालयं गच्छामि।

विद्यालयं गच्छामि अहम्।

गच्छामिअहम् विद्यालयं ।

उक्त तीनों के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

17. आपको जानकर हैरानी होगी कि Computer द्वारा गणित के सवालो को हल करने वाली विधि यानि Algorithms संस्कृत में बने है, ना कि अंग्रेजी में...

18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाएं जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super Computers संस्कृतभाषा पर आधारित होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए London और Ireland के कई स्कूलों में संस्कृत को Compulsory Subject बना दिया है।

20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा देशों की कम से कम एक University में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

संस्कृत, संस्कृति एवं संस्कार को वर्तमान में बचाने की सबसे अधिक आवश्यकता है।⛳