रविवार, 22 जुलाई 2018

बाल गंगाधर तिलक

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाल गंगाधर तिलक (२३ जुलाई १८५६ - १ अगस्त १९२०),
जन्म से केशव गंगाधर तिलक, एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। ये भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता हुएँ; ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे। उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय शीर्षक भी प्राप्त हुआ, जिसका अर्थ हैं लोगों द्वारा स्वीकृत (उनके नायक के रूप में)। इन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है।

उपनाम : बाल, लोकमान्य
जन्मस्थल : रत्नागिरी जिला, महाराष्ट्र
मृत्युस्थल: बम्बई, महाराष्ट्र
आन्दोलन: भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम

तिलक ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज के सबसे पहले और मजबूत अधिवक्ताओं में से एक थे, तथा भारतीय अन्तःकरण में एक प्रबल आमूल परिवर्तनवादी थे। उनका मराठी भाषा में दिया गया नारा "स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच" (स्वराज यह मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूँगा) बहुत प्रसिद्ध हुआ।

प्रारम्भिक जीवन

तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को ब्रिटिश भारत  में वर्तमान महाराष्ट्र स्थित रत्नागिरी जिले के एक गाँव चिखली में हुआ था। ये आधुनिक कालेज शिक्षा पाने वाली पहली भारतीय पीढ़ी में थे। इन्होंने कुछ समय तक स्कूल और कालेजों में गणित पढ़ाया। अंग्रेजी शिक्षा के ये घोर आलोचक थे और मानते थे कि यह भारतीय सभ्यता के प्रति अनादर सिखाती है। इन्होंने दक्खन शिक्षा सोसायटी की स्थापना की ताकि भारत में शिक्षा का स्तर सुधरे।

राजनीतिक यात्रा

लाल-बाल-पाल की त्रिमूर्ति का एक दुर्लभ चित्र जिसमें बायें से लाला लाजपतराय, बीच में तिलक जी और सबसे दायें बिपिनचन्द्र पाल बैठे हैं
तिलक ने इंग्लिश मेमराठा दर्पण व मराठी में केसरी  नाम से दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किये जो जनता में बहुत लोकप्रिय हुए। तिलक ने अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की बहुत आलोचना की। इन्होंने माँग की कि ब्रिटिश सरकार तुरन्त भारतीयों को पूर्ण स्वराज दे। केसरी में छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया।

तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन जल्द ही वे कांग्रेस के नरमपंथी रवैये के विरुद्ध बोलने लगे। 1907 में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में विभाजित हो गयी। गरम दल में तिलक के साथ लाला लाजपत राय और बिपिन चन्द्र पाल  शामिल थे। इन तीनों को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाने लगा। 1908 में तिलक ने क्रान्तिकारी प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन किया जिसकी वजह से उन्हें बर्मा (अब म्यांमार) स्थित मांडले की जेल भेज दिया गया। जेल से छूटकर वे फिर कांग्रेस में शामिल हो गये और 1916 में एनी बेसेंट और मुहम्मद अली जिन्ना के साथ अखिल भारतीय होम रूल लीग की स्थापना की।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से 1890 में जुड़े। हालांकि, उसकी मध्य अभिवृत्ति, खासकर जो स्वराज्य हेतु लड़ाई के प्रति थी, वे उसके ख़िलाफ़ थे। वे अपने समय के सबसे प्रख्यात आमूल परिवर्तनवादियों में से एक थे।

जल्दी शादी करने के व्यक्तिगत रूप से विरोधी होने के बावजूद, तिलक 1891 एज ऑफ़ कंसेन्ट विधेयक  के खिलाफ थे, क्योंकि वे उसे हिन्दू धर्म में दख़लअन्दाज़ी और एक ख़तरनाक नज़ीर के रूप में देख रहे थे। इस अधिनियम ने लड़की के विवाह करने की न्यूनतम आयु को 10 से बढ़ाकर 12 वर्ष कर दिया था।

आल इण्डिया होम रूल लीग

लाला लाजपत राय ने एनी बेसेंट की मदद से होम रुल लीग की स्थापना की यह कोई सत्याग्रह आंदोलन जैसा नहीं था इसमें चार या पांच लोगों की टुकड़ियां बनाई जाती थी जो पूरे भारत में बड़े बड़े राजनेताओं और वकीलों से मिलकर होम रूल लीग का मतलब समझाया करते थे एनी बेसेंट जो कि आयरलैंड से भारत आई हुई थी उन्होंने वहां पर होमरूल लीग जैसा प्रयोग देखा था उसी तरह का प्रयोग उन्होंने भारत में करने का सोचा

सामाजिक योगदान और विरासत

तिलक ने मराठी में मराठा दर्पण व केसरी नाम से दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किये जो जनता में बहुत लोकप्रिय हुए। तिलक ने अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की बहुत आलोचना की। इन्होंने माँग की कि ब्रिटिश सरकार तुरन्त भारतीयों को पूर्ण स्वराज दे। केसरी में छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया।

तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन जल्द ही वे कांग्रेस के नरमपंथी रवैये के विरुद्ध बोलने लगे। १९०७ में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में विभाजित हो गयी। गरम दल में तिलक के साथ लाला लाजपत राय और बिपिन चन्द्र पाल शामिल थे। इन तीनों को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाने लगा। १९०८ में तिलक ने क्रान्तिकारी प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन किया जिसकी वजह से उन्हें बर्मा (अब म्यांमार) स्थित मांडले की जेल भेज दिया गया। जेल से छूटकर वे फिर कांग्रेस में शामिल हो गये और १९१६ में एनी बेसेंट और मुहम्मद अली जिन्ना के साथ अखिल भारतीय होम रूल लीग की स्थापना की।

मृत्यु

सन १९१९ ई. में कांग्रेस की अमृतसर बैठक में हिस्सा लेने के लिये स्वदेश लौटने के समय तक तिलक इतने नरम हो गये थे कि उन्होंने मॉन्टेग्यू-चेम्सफ़ोर्ड सुधारों के ज़रिये स्थापित लेजिस्लेटिव कौंसिल (विधायी परिषद) के चुनाव के बहिष्कार की गान्धी की नीति का विरोध ही नहीं किया। इसके बजाय तिलक ने क्षेत्रीय सरकारों में कुछ हद तक भारतीयों की भागीदारी की शुरुआत करने वाले सुधारों को लागू करने के लिये प्रतिनिधियों को यह सलाह अवश्य दी कि वे उनके प्रत्युत्तरपूर्ण सहयोग की नीति का पालन करें। लेकिन नये सुधारों को निर्णायक दिशा देने से पहले ही १ अगस्त,१९२० ई. को बम्बई में उनकी मृत्यु हो गयी। मरणोपरान्त श्रद्धांजलि देते हुए गान्धी जी ने उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता कहा और जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय क्रान्ति का जनक बतलाया। "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" का नारे देने वालेे स्वातंत्रता के महानायक गंगाधर तिलक का 1 अगस्त,1920 ई. को मुम्बई में देहान्त हुआ था।

पुस्तकें

तिलक जी ने यूँ तो अनेक पुस्तकें लिखीं किन्तु श्रीमद्भगवद्गीता की व्याख्या को लेकर मांडले जेल में लिखी गयी गीता-रहस्य सर्वोत्कृष्ट है जिसका कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है।

उनकी लिखी हुई सभी पुस्तकों का विवरण इस प्रकार है-

वेद काल का निर्णय (The Orion)
आर्यों का मूल निवास स्थान (The Arctic Home in the Vedas)
श्रीमद्भागवतगीता रहस्य अथवा कर्मयोग शास्त्र
वेदों का काल-निर्णय और वेदांग ज्योतिष (Vedic Chronology & Vedang Jyotish)
हिन्दुत्व
श्यामजीकृष्ण वर्मा को लिखे तिलक के पत्र
उनकी समस्त पुस्तकें मराठी अँग्रेजी और हिन्दी में लोकमान्य तिलक मन्दिर, नारायण पैठ, पुणे से सर्वप्रथम प्रकाशित हुईं। बाद में उन्हें अन्य प्रकाशकों ने भी छापा।

गुरुवार, 19 जुलाई 2018

आइए जाने कितना दिलचस्प है इंसान का शरीर...

अद्भुत है इंसान का शरीर

*जबरदस्त फेफड़े*

हमारे फेफड़े हर दिन 20 लाख लीटर हवा को फिल्टर करते हैं. हमें इस बात की भनक भी नहीं लगती. फेफड़ों को अगर खींचा जाए तो यह टेनिस कोर्ट के एक हिस्से को ढंक देंगे.

*ऐसी और कोई फैक्ट्री नहीं*

हमारा शरीर हर सेकंड 2.5 करोड़ नई कोशिकाएं बनाता है. साथ ही, हर दिन 200 अरब से ज्यादा रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है. हर वक्त शरीर में 2500 अरब रक्त कोशिकाएं मौजूद होती हैं. एक बूंद खून में 25 करोड़ कोशिकाएं होती हैं.

*लाखों किलोमीटर की यात्रा*

इंसान का खून हर दिन शरीर में 1,92,000 किलोमीटर का सफर करता है. हमारे शरीर में औसतन 5.6 लीटर खून होता है जो हर 20 सेकेंड में एक बार पूरे शरीर में चक्कर काट लेता है.

*धड़कन, धड़कन*

एक स्वस्थ इंसान का हृदय हर दिन 1,00,000 बार धड़कता है. साल भर में यह 3 करोड़ से ज्यादा बार धड़क चुका होता है. दिल का पम्पिंग प्रेशर इतना तेज होता है कि वह खून को 30 फुट ऊपर उछाल सकता है.

*सारे कैमरे और दूरबीनें फेल*

इंसान की आंख एक करोड़ रंगों में बारीक से बारीक अंतर पहचान सकती है. फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसका मुकाबला कर सके.

*नाक में एंयर कंडीशनर*

हमारी नाक में प्राकृतिक एयर कंडीशनर होता है. यह गर्म हवा को ठंडा और ठंडी हवा को गर्म कर फेफड़ों तक पहुंचाता है.

*400 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार*

तंत्रिका तंत्र 400 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से शरीर के बाकी हिस्सों तक जरूरी निर्देश पहुंचाता है. इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं.

*जबरदस्त मिश्रण*

शरीर में 70 फीसदी पानी होता है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कार्बन, जिंक, कोबाल्ट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, निकिल और सिलिकॉन होता है.

*बेजोड़ झींक*

झींकते समय बाहर निकले वाली हवा की रफ्तार 166 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है. आंखें खोलकर झींक मारना नामुमकिन है.

*बैक्टीरिया का गोदाम*

इंसान के वजन का 10 फीसदी हिस्सा, शरीर में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है. एक वर्ग इंच त्वचा में 3.2 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं.

*ईएनटी की विचित्र दुनिया*

आंखें बचपन में ही पूरी तरह विकसित हो जाती हैं. बाद में उनमें कोई विकास नहीं होता. वहीं नाक और कान पूरी जिंदगी विकसित होते रहते हैं. कान लाखों आवाजों में अंतर पहचान सकते हैं. कान 1,000 से 50,000 हर्ट्ज के बीच की ध्वनि तरंगे सुनते हैं.

*दांत संभाल के*

इंसान के दांत चट्टान की तरह मजबूत होते हैं. लेकिन शरीर के दूसरे हिस्से अपनी मरम्मत खुद कर लेते हैं, वहीं दांत बीमार होने पर खुद को दुरुस्त नहीं कर पाते.

*मुंह में नमी*

इंसान के मुंह में हर दिन 1.7 लीटर लार बनती है. लार खाने को पचाने के साथ ही जीभ में मौजूद 10,000 से ज्यादा स्वाद ग्रंथियों को नम बनाए रखती है.

*झपकती पलकें*

वैज्ञानिकों को लगता है कि पलकें आंखों से पसीना बाहर निकालने और उनमें नमी बनाए रखने के लिए झपकती है. महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी बार पलके झपकती हैं.

*नाखून भी कमाल के*

अंगूठे का नाखून सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ता है. वहीं मध्यमा या मिडिल फिंगर का नाखून सबसे तेजी से बढ़ता है.

*तेज रफ्तार दाढ़ी*

पुरुषों में दाढ़ी के बाल सबसे तेजी से बढ़ते हैं. अगर कोई शख्स पूरी जिंदगी शेविंग न करे तो दाढ़ी 30 फुट लंबी हो सकती है.

*खाने का अंबार*

एक इंसान आम तौर पर जिंदगी के पांच साल खाना खाने में गुजार देता है. हम ताउम्र अपने वजन से 7,000 गुना ज्यादा भोजन खा चुके होते हैं.

*बाल गिरने से परेशान*

एक स्वस्थ इंसान के सिर से हर दिन 80 बाल झड़ते हैं.

*सपनों की दुनिया*

इंसान दुनिया में आने से पहले ही यानी मां के गर्भ में ही सपने देखना शुरू कर देता है. बच्चे का विकास वसंत में तेजी से होता है.

*नींद का महत्व*

नींद के दौरान इंसान की ऊर्जा जलती है. दिमाग अहम सूचनाओं को स्टोर करता है. शरीर को आराम मिलता है और रिपेयरिंग का काम भी होता है. नींद के ही दौरान शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स निकलते हैं.














 

बुधवार, 18 जुलाई 2018

निर्मित को नहीं निर्माता को प्रभावित कीजिए...

जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है, उसी पल से आपकी पहचान एक "बॉडी" बन जाती है। अरे "बॉडी" लेकर आइये, "बॉडी" को उठाइये, "बॉडी" को सूलाइये ऐसे शब्दो से आपको पूकारा जाता है, वे लोग भी आपको आपके नाम से नही पुकारते , जिन्हे प्रभावित करने के लिये आपने अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर दी। इसीलिए "निर्मिती" को नहीं "निर्माता" को प्रभावित करने के लिये जीवन जियो। जीवन मे आने वाले हर चूनौती को स्वीकार करे। अपनी पसंद की चीजो के लिये खर्चा किजिये। इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये। आप कितना भी बूरा नाचते हो , फिर भी नाचिये। उस खूशी को महसूस किजिये। फोटोज् के लिये पागलों वाली पोज् दिजिये। बिलकुल छोटे बच्चे बन जाइयें क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे बड़ा लॉस नहीं है। लॉस तो वो है के आप जिंदा होकर भी आपके अंदर जिंदगी जीने की आस खत्म हो चूकी है। हर पल को खूशी से जीने को ही जिंदगी कहते है। "जिंदगी है छोटी, हर पल में खुश हूं,
काम में खुश हूं, आराम में खुश हू,
आज पनीर नहीं, दाल में ही खुश हूं,
आज गाड़ी नहीं, पैदल ही खुश हूं,
दोस्तों का साथ नहीं, अकेला ही खुश हूं,
आज कोई नाराज है, उसके इस अंदाज से ही खुश हूं,
जिस को देख नहीं सकता, उसकी आवाज से ही खुश हूं,
जिसको पा नहीं सकता, उसको सोच कर ही खुश हूं,
बीता हुआ कल जा चुका है, उसकी मीठी याद में ही खुश हूं,
आने वाले कल का पता नहीं, इंतजार में ही खुश हूं,
हंसता हुआ बीत रहा है पल, आज में ही खुश हूं,
जिंदगी है छोटी, हर पल में खुश हूं,
अगर दिल को छुआ, तो जवाब देना, वरना बिना जवाब के भी खुश हूं..!😊 कमल सिंघल 🙏

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान शब्द का जनक जन्म से एक कश्मीरी ब्राह्मण था...

"पाकिस्तान" शब्द का जनक सियालकोट का रहनेवाला 'मुहम्मद इकबाल' था।

जो कि जन्म से एक कश्मीरी ब्राह्मण था परन्तु बाद में मुसलमान बन गया था। ये वही मुहम्मद इकबाल है, जिसने प्रसिद्ध गीत "सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा" लिखा हैं।

इसी इकबाल ने अपने गीत में एक जगह लिखा है कि "मजहब नहीं सिखाता... आपस में बैर रखना"

परन्तु इसी इकबाल ने अपनी एक किताब "कुल्लियाते इकबाल" में अपने बारे में लिखा है...

"मिरा बिनिगर कि दरहिन्दोस्तां दीगर नमी बीनी, बिरहमनजादए रम्ज आशनाए रूम औ तबरेज अस्त"
अर्थात
मुझे देखो... मेरे जैसा हिंदुस्तान में दूसरा कोई नहीं होगा..! क्योंकि मैं एक ब्राह्मण की औलाद हूँ। लेकिन मौलाना रूम और मौलाना तबरेज से प्रभावित होकर मुसलमान बन गया..!

कालांतर में यही इकबाल... मुस्लिम लीग का अध्यक्ष बन गया और हैरत कि बात हैं कि जो इकबाल "सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा" लिखा और "मजहब नहीं सिखाता... आपस में बैर रखना" जैसे बोल बोले थे, उसी इकबाल ने... मुस्लिम लीग खिलाफत मूवमेंट के समय... 1930 के इलाहाबाद में मुस्लिमलीग के सम्मलेन में कहा था... "हो जाये अगर शाहे खुरासां का इशारा, सिजदा न करूं हिन्दोस्तां की नापाक जमीं पर... 

यानि

यदि तुर्की का खलीफा अब्दुल हमीद (जिसको अँगरेजों ने 1920 में गद्दी से उतार दिया था) इशारा कर दे... तो मैं इस "नापाक हिंदुस्तान" पर नमाज भी नहीं पढूंगा। बादमें... इसी "नापाक" शब्द का विपरीत शब्द लेकर "पाक" से "पाकिस्तान" बनाया गया...

जिसका शाब्दिक अर्थ हैं... (मुस्लिमों के लिए) पवित्र देश..!

कहने का तात्पर्य ये है कि हिन्दू बहुल क्षेत्र होने के कारण... मुस्लिमों को हिंदुस्तान "नापाक" लगता था... इसीलिए मुस्लिमों ने अपने लिए तथाकथित पवित्र देश "पाकिस्तान" बनवा लिया।

अब इस सारी कहानी में... समझने की बात यह है कि जब एक कश्मीरी ब्राह्मण के धर्म परिवर्तन करने के बाद... अपने देश और अपनी मातृभूमि के बारे में सोच... इतनी जहरीली हो सकती है... तो आज हिन्दुओं की अज्ञानता और उदासीनता का लाभ उठा कर... जकारिया नाईक जैसे.... समाज के दुश्मनों द्वारा हजारों-लाखों हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है... उसका परिणाम कितना भयानक हो सकता हैं।

ऐसे में मुझे एक मौलाना की वो प्रसिद्द उक्ति याद आ रही है... जिसमे उसने कहा था कि देखिये हमारे तो इतने इस्लामी देश हैं, इसीलिए अगर हमारे लिए जमीन तंग हो जाएगी तो हम किसी भी देश में जाकर कहेंगे "अस्सलामु अलैकुम" और वह कहेगा "वालेकुम अस्सलाम" साथ ही हमें भाई समझ कर अपना लेगा, लेकिन मैं हिन्दुओं से एक मासूम-सा सवाल पूछना चाहता हूँ कि उनके राम-राम का जवाब देने वाला कौन-सा देश है..?

इसलिए जो यह लेख पढ़ रहे हैं, उन सभी हिन्दू भाइयों-बहनों से निवेदन है कि जकारिया नायक जैसे क्षद्मजिहादी और इस्लाम का पर्दाफाश करने में हर प्रकार का सहयोग करें...

याद रखें कि अगर धर्म नहीं रहेगा तो देश भी नहीं रहेगा। क्योंकि देश और धर्म का अटूट सम्बन्ध हैं... जिस तरह धर्म के लिए देश की जरुरत होती हैं... ठीक उसी तरह देश की एकता के लिए भी धर्म की जरूरत होती हैं।

इसीलिए अगर हमारे हिन्दुस्थान को बचाना हैं तो जाति और क्षेत्रवाद का भेद भूलकर... कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और कच्छ से लेकर असम तक के सारे हिन्दुओं को एक होना ही होगा।

जय हिंदुत्व... जय हिन्दुराष्ट्र...

✊🏻 जय जय श्री राम 🚩

शनिवार, 14 जुलाई 2018

क्या हमारा #पहनावा सामने वाले #व्यवहार को प्रभावित करता है..?

बहुत से बुद्धिजीवियों को आपने यह कहता सुना होगा कि कपड़े कोई मायने नहीं रखते हैं... खासकर तब जब चर्चा का विषय महिलाओं से छेड़छाड़/बलात्कार का हो... लेकिन यह सरासर झूठ है... कपड़े ही व्यक्ति की विचारधारा एवं व्यक्तित्व को दर्शाते हैं... शायद कई लोगों को मेरी बात कड़वी एवं गलत लगे लेकिन यह सत्य है कि छेड़छाड़ एवं बलात्कार में कपड़े एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं...
अब इस विषय को थोड़ा घुमाते हैं... छेड़छाड़ केवल लड़कियों से ही नहीं की जाती... हर बार केवल लड़के ही किसी लड़की को फोन करके तंग नहीं करते... हर बार फेसबुक पर केवल लड़के ही  लड़कियों को  फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं भेजते... हर बार प्रपोज लड़के ही नहीं करते... ये सब हरकते लड़कियों द्वारा भी की जाती हैं... और यह सब करने का जोखिम हम तभी उठाते हैं, जब हमें सामने कुछ संभावना नजर आएं...
अब मैं मेरे निजी जीवन के माध्यम से आपको समझाता हूं... मैंने अपने जीवन में कभी किसी को प्रपोज नहीं किया... मुझे बहुत बार बिना किसी जान पहचान के लड़कियों के फोन मित्रता बढ़ाने हेतु आएं... कई बार लड़कियों द्वारा प्रेम प्रस्ताव मिला... कई लड़कियों ने मुझसे डबल मीनिंग में बात की... बहुत सी लड़कियों के Facebook पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, उसके बाद मैसेंजर पर बातें हुई... इस तरह की काफी घटनाएं है और यह सब तब की हैं, जब मैं कहीं ना कहीं इन सब के लिए तैयार था... जब से मैंने सादा जीवन जीना शुरु किया, कुर्ते-पजामे पहनने शुरू किये, Facebook को भी आध्यात्मिक एवं देश भक्ति भावनाओं को साझा करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया तब से इन सभी घटनाओं पर पूर्ण विराम लग गया...
मेरे पहनावे को देख कर किसी लड़की के मन में इस तरह की भावना नहीं आती, कारण उसे लगता है कि यह इस तरह का लड़का नहीं हैं...
मैं इस पोस्ट से केवल यही समझाना चाहता हूं... मेरे कहने का केवल इतना-सा भाव है कि अगर मेरे 'लड़का' होने के बावजूद भी... मेर पहनावे के कारण लड़कियों के व्यवहार में परिवर्तन आता है तो लड़कियों के पहनावे से लड़कों के व्यवहार/मानसिकता में परिवर्तन आना स्वभाविक हैं...
इसलिए पहनावा सुंदर डालिए लेकिन सभ्य डालिए... आपके कपड़े ऐसे हो जिसे डालने के बाद आप सुंदर लगे, ना कि असभ्य/उत्तेजित... कपड़ों का आविष्कार बदन को ढकने के लिए किया गया था, दिखाने के लिए नहीं... बच्चों के माता-पिता से अनुरोध बच्चों के द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों का आंकलन कीजिए... उनकी T-Shirt  पर लिखी जाने वाली wording पर ध्यान दीजिए...
यकीन मानिए सभ्य कपड़ो में एक सुंदर लड़की को देखकर कोई भी लड़का उससे शादी करने की तो सोच सकता है लेकिन उसके मन में कोई गलत विचार नहीं आएगा और इसके विपरीत असभ्य कपड़ों में लड़की को देख कर कोई भी लड़का कुछ गलत करने की तो सोच सकता है लेकिन कभी भी उससे शादी करने की नहीं सोचेगा...
मेरे द्वारा लिखी गई इस पोस्ट में की गई गलतियों के लिए क्षमा🙏 आप सब से अनुरोध कृपया इस लेख के शब्दों को नहीं भावनाओं को पढ़ें...

✍🏻 कमल सिंघल🙏🏻
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शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

किसी इंसान कानखजूरा काट लेता है या कान में घुस जाता है तो क्या करना चाहिए? एक बार जरुर जान लें :-

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है और जैसा की हम सभी जानते हैं इस मौसम में कीडे मकौड़े बाहर आते हैं। इसमें सबसे खतरनाक कनखूजरे को माना जाता है। कनखूजरे के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं होती। इसलिए अगर किसी को कनखूजरा काटता है तो मालूम नहीं होता की क्या करना चाहिए। इसलिए आज हम आपको बताएंगे की कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करना चाहिए। अमूमन देखा जाता है कि लोगों को जब कनखजूरा काट लेता है तो समझ में नहीं आता है कि क्या करना चाहिए। तो आइये आपको बता देते हैं कि कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करना चाहिए।

कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करें?

आपको बता दें कि कनखजूरा सांप की तरह ही जहरीला जानवर माना जाता है। कनखजूरा सांप की तरह ही काटने के बाद शरीर में जहर छोड़ता है। कनखजूरा के काटने पर इंसान को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है। सांस में तकलीफ के अलावा शरीर में काफी दर्द भी होता है। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी की कनखजूरा का काटना जानलेवा नहीं होता है। लेकिन, इस के काटने पर होने वाला दर्द कभी कभी काफी अधिक होता है जो कभी कभी बर्दास्त के बाहर हो जाता है।

लेकिन, अक्सर देखा जाता है कि कनखजूरा काटने के अलावा कान के रास्ते अंदर घुस जाता है। यह बेहद खतरनाक माना जाता है। दरअसल, कनखजूरा अक्सर अंधेरे में रहता है और इसी वजह से वह अक्सर कान में घुस जाता है। इसके अलावा, बरसात के मौसम में भी कनखजूरा बहुत निकलते हैं। कनखजूरे का कानों घुसना काफी दर्दनाक होता है। कनखजूरा इंसान के कान में चिपक जाता है जिसे निकालना काफी मुश्किल होता है। कनखजूरा के काटने पर उसका जहर शरीर में पहुंच जाता है और थकान के साथ साथ सांस लेने में तकलीफ होती है।

कनखजूरे काटने का इलाज और तरीका

आपको बता दें कि कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर क्या करना चाहिए। आज हम आपको बता देते हैं कि कनखजूरे काटने का इलाज और तरीका क्या है। अगर किसी के कान में कनखजूरा घुस जाए तो पानी में सेंधा नमक मिलाकर कान में डालने से वह मर जाता है। सेंधा नमक की वजह से वह मरकर कान से बाहर निकल जाता है। इसके अलावा, अगर कनखजूरा शरीर से चिपक जाए तो उसके मुंह पर चीनी डालने से वह शरीर को छोड़ देता है। इसी तरह अगर किसी को कनखजूरा काट ले तो हल्दी और सेंधा नमक का मिश्रण लेकर इसे गाय के घी में वहां पर लगाये।

ऐसा करने से कनखजूरा का विष खत्म हो जाता है। ये वो तरीके हैं जिनसे कनखजूरा के काटने या कान में घुसने पर इलाज किया जा सकता है। अगर आपके आस पास या घर में किसी को कनखजूरा के काट ले या कान में घुसने जाये तो ये उपाय करके उसे ठीक किया जा सकता है। आपको बता दें की कनखजूरा अगर इंसान को काटे तो यह जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसके काटने के बाद अगर सही उपचार नहीं हुआ तो इंसान के लिए यह जानलेवा हो सकता है। लेकिन, अगर यह चूहों को काट ले तो 30 सेकंड में उसकी मौत हो जाती है।

रविवार, 1 जुलाई 2018

बिना थर्मामीटर के तापमान की जानकारी और आयु के अनुसार रक्‍तचाप :

किसी भी व्यक्ति का शरीर का तापमान की जानकारी लेना हो बिना किसी भी थर्मामीटर या किसी भी अन्य यंत्र के तो नीचे लिखे तरीके से जानकारी ले सकते है ।
पुरुष की नाड़ी परीक्षण हमेशा दाहिनी हाथ से किया जाता है और महिला की बायी हाथ से।

अगर किस भी व्यक्ति का शरीर का :
60-65 पल्स है तो शरीर का तापमान 98 डिग्री फ़रेनहाएट
70 पल्स है तो 99 डिग्री फ़रेनहाएट तापमान
80 पल्स है तो 100 डिग्री तापमान
90 पल्स = 101 डिग्री फ़रेनहाएट
100 पल्स = 102 डिग्री फ़रेनहाएट
110 पल्स = 103 डिग्री फ़रेनहाएट
120 पल्स = 104 डिग्री फ़रेनहाएट
130 पल्स = 105 डिग्री फ़रेनहाएट
140 पल्स = 106 डिग्री फ़रेनहाएट
यानि हर 10 स्पंदन बढ़ने पर 1 डिग्री तापमान शरीर का बढ़ेगा गर्भ में बच्चा का पल्स 140 से 150 होगा
सबसे अच्छा पल्स 70 से 74 के बीच होना चाहिए ।

आयु के अनुसार रक्‍तचाप (Blood Pressure) नापने का अद्भुत तरीका।
गर्भ में बच्चा का बी पी माँ के बी पी के बराबर होगा

जन्म से 5 साल तक बी पी का हाईयर लिमिट 81 और लोअर लिमिट 45
5 साल से 10 साल तक बी पी का हाईयर लिमिट 90 और लोअर 50
10 साल से 15 साल तक हाई 100 और लोअर 62
15 साल से 20 साल तक हाई बी पी 110 और लोअर बी पी 71
20 साल से 30 साल तक हाई बी पी 120 और लोअर बी पी 80
30 साल से 35 साल तक हाई बी पी 124 और लोअर बी पी 82
35 साल से 40 साल तक हाई बी पी 126 और लोअर बी पी 83
40 साल से 50 साल तक हाई बी पी 128 और लोअर बी पी 84
50 साल से 60 साल तक हाई बी पी 132 और लोअर बी पी 86
60 साल से 65 साल तक हाई बी पी 136 और लोअर बी पी 88
65 साल से 80 साल तक हाई बी पी 140 और लोअर बी पी 90
80 साल से ऊपर तक हाई बी पी 145 और लोअर बी पी 92
किसी किसी का बी पी में + 5 या – 5 का अंतर हो सकता है तो किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी । उस से ज्यादा अंतर आने पर व्यक्ति बीमार कहलाएगा

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