गुरुवार, 31 अगस्त 2017

पितृ-पक्ष - श्राद्ध

स सृष्टि में हर चीज का अथवा प्राणी का जोड़ा है। जैसे - रात और दिन, अँधेरा और उजाला, सफ़ेद और काला, अमीर और गरीब अथवा नर और नारी इत्यादि बहुत गिनवाये जा सकते हैं। सभी चीजें अपने जोड़े से सार्थक है अथवा एक-दूसरे के पूरक है। दोनों एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। इसी तरह दृश्य और अदृश्य जगत का भी जोड़ा है। दृश्य जगत वो है, जो हमें दिखता है और अदृश्य जगत वो है, जो हमें नहीं दिखता..! ये भी एक-दूसरे पर निर्भर है और एक-दूसरे के पूरक हैं। पितृ-लोक भी अदृश्य-जगत का हिस्सा है और अपनी सक्रियता के लिये दृश्य जगत के श्राद्ध पर निर्भर है।

•• धर्म ग्रंथों के अनुसार श्राद्ध के सोलह दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर श्राद्ध करते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा चुकाया जाता है। वर्ष के किसी भी मास तथा तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृपक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता हैं।
•• पूर्णिमा पर देहांत होने से भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को श्राद्ध करने का विधान है। इसी दिन से महालय (श्राद्ध) का प्रारंभ भी माना जाता है। श्राद्ध का अर्थ है, श्रद्धा से जो कुछ दिया जाएं। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण वर्षभर तक प्रसन्न रहते हैं। धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि पितरों का पिण्ड दान करने वाला गृहस्थ दीर्घायु, पुत्र-पौत्रादि, यश, स्वर्ग, पुष्टि, बल, लक्ष्मी, पशु, सुख-साधन तथा धन-धान्य आदि की प्राप्ति करता है।
•• श्राद्ध में पितरों को आशा रहती है कि हमारे पुत्र-पौत्रादि हमें पिण्ड दान तथा तिलांजलि प्रदान कर संतुष्ट करेंगे। इसी आशा के साथ वे पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं। यही कारण है कि हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रत्येक हिंदू गृहस्थ को पितृपक्ष में श्राद्ध अवश्य रूप से करने के लिए कहा गया है।
•• श्राद्ध से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं। मगर ये बातें श्राद्ध करने से पूर्व जान लेना बहुत जरूरी है क्योंकि कई बार विधिपूर्वक श्राद्ध न करने से पितृ श्राप भी दे देते हैं। आज हम आपको श्राद्ध से जुड़ी कुछ विशेष बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं--

♍1- श्राद्धकर्म में गाय का घी, दूध या दही काम में लेना चाहिए। यह ध्यान रखें कि गाय को बच्चा हुए दस दिन से अधिक हो चुके हैं। दस दिन के अंदर बछड़े को जन्म देने वाली गाय के दूध का उपयोग श्राद्ध कर्म में नहीं करना चाहिए।
♍2- श्राद्ध में चांदी के बर्तनों का उपयोग व दान पुण्यदायक तो है ही राक्षसों का नाश करने वाला भी माना गया है। पितरों के लिए चांदी के बर्तन में सिर्फ पानी ही दिए जाए तो वह अक्षय तृप्तिकारक होता है। पितरों के लिए अर्घ्य, पिण्ड और भोजन के बर्तन भी चांदी के हों तो और भी श्रेष्ठ माना जाता है।
♍3- श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाते समय परोसने के बर्तन दोनों हाथों से पकड़ कर लाने चाहिए, एक हाथ से लाए अन्न पात्र से परोसा हुआ भोजन राक्षस छीन लेते हैं।
♍4- ब्राह्मण को भोजन मौन रहकर एवं व्यंजनों की प्रशंसा किए बिना करना चाहिए क्योंकि पितर तब तक ही भोजन ग्रहण करते हैं, जब तक ब्राह्मण मौन रह कर भोजन करें।
♍5- जो पितृ शस्त्र आदि से मारे गए हों उनका श्राद्ध मुख्य तिथि के अतिरिक्त चतुर्दशी को भी करना चाहिए। इससे वे प्रसन्न होते हैं। 
♍6- श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाना आवश्यक है, जो व्यक्ति बिना ब्राह्मण के श्राद्ध कर्म करता है, उसके घर में पितर भोजन नहीं करते, श्राप देकर लौट जाते हैं। ब्राह्मण हीन श्राद्ध से मनुष्य महापापी होता है।
♍7- श्राद्ध में जौ, कांगनी, मटरसरसों का उपयोग श्रेष्ठ रहता है। तिल की मात्रा अधिक होने पर श्राद्ध अक्षय हो जाता है। वास्तव में तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं। कुशा (एक प्रकार की घास) राक्षसों से बचाते हैं।
♍8- दूसरे की भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। वन, पर्वत, पुण्यतीर्थ एवं मंदिर दूसरे की भूमि नहीं माने जाते क्योंकि इन पर किसी का स्वामित्व नहीं माना गया है। अत: इन स्थानों पर श्राद्ध किया जा सकता है।
♍9- चाहे मनुष्य देवकार्य में ब्राह्मण का चयन करते समय न सोचे, लेकिन पितृ कार्य में योग्य ब्राह्मण का ही चयन करना चाहिए क्योंकि श्राद्ध में पितरों की तृप्ति ब्राह्मणों द्वारा ही होती है।
♍10- जो व्यक्ति किसी कारणवश एक ही नगर में रहनी वाली अपनी बहिन, जमाई और भानजे को श्राद्ध में भोजन नहीं कराता, उसके यहां पितर के साथ ही देवता भी अन्न ग्रहण नहीं करते।
♍11- श्राद्ध करते समय यदि कोई भिखारी आ जाए तो उसे आदरपूर्वक भोजन करवाना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसे समय में घर आए याचक को भगा देता है उसका श्राद्ध कर्म पूर्ण नहीं माना जाता और उसका फल भी नष्ट हो जाता है।
♍12- शुक्लपक्ष में, रात्रि में, युग्म दिनों (एक ही दिन दो तिथियों का योग)में तथा अपने जन्मदिन पर कभी श्राद्ध नहीं करना चाहिए। धर्म ग्रंथों के अनुसार सायंकाल का समय राक्षसों के लिए होता है, यह समय सभी कार्यों के लिए निंदित है। अत: शाम के समय भी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए।
♍13- श्राद्ध में प्रसन्न पितृगण मनुष्यों को पुत्र, धन, विद्या, आयु, आरोग्य, लौकिक सुख, मोक्ष और स्वर्ग प्रदान करते हैं। श्राद्ध के लिए शुक्लपक्ष की अपेक्षा कृष्णपक्ष श्रेष्ठ माना गया है।
♍14- रात्रि को राक्षसी समय माना गया है। अत: रात में श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। दोनों संध्याओं के समय भी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए। दिन के आठवें मुहूर्त (कुतपकाल) में पितरों के लिए दिया गया दान अक्षय होता है।
♍15- श्राद्ध में ये चीजें होना महत्वपूर्ण हैं- गंगाजल, दूध, शहद, दौहित्र, कुश और तिल। केले के पत्ते पर श्राद्ध भोजन निषेध है। सोने, चांदी, कांसे, तांबे के पात्र उत्तम हैं। इनके अभाव में पत्तल उपयोग की जा सकती है।
♍16- तुलसी से पितृगण प्रसन्न होते हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि पितृगण गरुड़ पर सवार होकर विष्णु लोक को चले जाते हैं। तुलसी से पिंड की पूजा करने से पितर लोग प्रलयकाल तक संतुष्ट रहते हैं।
♍17- रेशमी, कंबल, ऊन, लकड़ी, तृण, पर्ण, कुश आदि के आसन श्रेष्ठ हैं। आसन में लोहा किसी भी रूप में प्रयुक्त नहीं होना चाहिए।
♍18- चना, मसूर, उड़द, कुलथी, सत्तू, मूली, काला जीरा, कचनार, खीरा, काला उड़द, काला नमक, लौकी, बड़ी सरसों, काले सरसों की पत्ती और बासी, अपवित्र फल या अन्न श्राद्ध में निषेध हैं।
♍19- भविष्य पुराण के अनुसार श्राद्ध 12 प्रकार के होते हैं, जो इस प्रकार हैं-
1- नित्य, 2- नैमित्तिक, 3- काम्य, 4- वृद्धि, 5- सपिण्डन, 6- पार्वण, 7- गोष्ठी, 8- शुद्धर्थ, 9- कर्मांग, 10- दैविक, 11- यात्रार्थ, 12- पुष्टयर्थ
♍20- श्राद्ध के प्रमुख अंग इस प्रकार :
तर्पण- इसमें दूध, तिल, कुशा, पुष्प, गंध मिश्रित जल पितरों को तृप्त करने हेतु दिया जाता है। श्राद्ध पक्ष में इसे नित्य करने का विधान है।
भोजन व पिण्ड दान-- पितरों के निमित्त ब्राह्मणों को भोजन दिया जाता है। श्राद्ध करते समय चावल या जौ के पिण्ड दान भी किए जाते हैं।
वस्त्रदान-- वस्त्र दान देना श्राद्ध का मुख्य लक्ष्य भी है।
दक्षिणा दान-- यज्ञ की पत्नी दक्षिणा है जब तक भोजन कराकर वस्त्र और दक्षिणा नहीं दी जाती, उसका फल नहीं मिलता..!
♍21 - श्राद्ध तिथि के पूर्व ही यथाशक्ति विद्वान ब्राह्मणों को भोजन के लिए बुलावा दें। श्राद्ध के दिन भोजन के लिए आए ब्राह्मणों को दक्षिण दिशा में बैठाएं।
♍22- पितरों की पसंद का भोजन दूध, दही, घी और शहद के साथ अन्न से बनाए गए पकवान जैसे खीर आदि है। इसलिए ब्राह्मणों को ऐसे भोजन कराने का विशेष ध्यान रखें।
♍23- तैयार भोजन में से गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए थोड़ा सा भाग निकालें। इसके बाद हाथ जल, अक्षत यानी चावल, चन्दन, फूल और तिल लेकर ब्राह्मणों से संकल्प लें।
♍24- कुत्ते और कौए के निमित्त निकाला भोजन कुत्ते और कौए को ही कराएं किंतु देवता और चींटी का भोजन गाय को खिला सकते हैं। इसके बाद ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं। पूरी तृप्ति से भोजन कराने के बाद ब्राह्मणों के मस्तक पर तिलक लगाकर यथाशक्ति कपड़े, अन्न और दक्षिणा दान कर आशीर्वाद पाएं।
♍25- ब्राह्मणों को भोजन के बाद घर के द्वार तक पूरे सम्मान के साथ विदा करके आएं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ब्राह्मणों के साथ-साथ पितर लोग भी चलते हैं। ब्राह्मणों के भोजन के बाद ही अपने परिजनों, दोस्तों और रिश्तेदारों को भोजन कराएं।
♍26- पिता का श्राद्ध पुत्र को ही करना चाहिए। पुत्र के न होने पर पत्नी श्राद्ध कर सकती है। पत्नी न होने पर सगा भाई और उसके भी अभाव में सपिंडो (परिवार के) को श्राद्ध करना चाहिए। एक से अधिक पुत्र होने पर सबसे बड़ा पुत्र श्राध्दकर्म करें या सबसे छोटा पुत्र करें।
♍ॐ पितृ देवाय नमः♍

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

मोबाइल से जुडी विचित्र जानकारी

मोबाइल  से  जुडी  कई  ऐसी  बातें  जिनके  बारे  में  हमें  जानकारी  नहीं  होती  लेकिन  मुसीबत  के  वक्त  यह  मददगार  साबित  होती  है ।

         इमरजेंसी नंबर ---

            दुनिया  भर  में  मोबाइल  का  इमरजेंसी  नंबर  112  है । अगर  आप  मोबाइल  की  कवरेज  एरिया  से  बाहर  हैं
तो  112  नंबर  द्वारा  आप  उस  क्षेत्र  के  नेटवर्क  को  सर्च  कर  लें। ख़ास  बात  यह  है  कि  यह  नंबर  तब  भी  काम  करता  है  जब  आपका  की  पैड  लौक  हो।

             जानकारी अभी  बाकी  है---

               मोबाइल  जब  बैटरी  लो  दिखाए  और  उस  दौरान  जरूरी  कॉल  करनी  हो, ऐसे  में  आप  *3370#  डायल  करें । आपका  मोबाइल  फिर  से   चालू  हो  जायेगा और  आपका  सेलफोन  बैटरी  में  50  प्रतिशत  का  इजाफा  दिखायेगा। मोबाइल  का  यह  रिजर्व  दोबारा  चार्ज  हो  जायेगा  जब आप  अगली  बार  मोबाइल  को  हमेशा  की  तरह  चार्ज  करेंगे।

           मोबाइल  चोरी  होने पर---

              मोबाइल  फोन  चोरी  होने  की स्थिति  में  सबसे  पहले  जरूरत  होती  है,  फोन  को  निष्क्रिय  करने  की  ताकि  चोर  उसका  दुरुपयोग  न  कर  सके । अपने  फोन  के  सीरियल  नंबर  को  चेक  करने  के  लिए  *#06#  दबाएँ । इसे  दबाते  ही  आपकी  स्क्रीन  पर  15  डिजिट  का  कोड  नंबर  आयेगा। इसे  नोट  कर  लें  और  किसी  सुरक्षित  स्थान  पर रखें। जब  आपका  फोन  खो  जाए  उस  दौरान  अपने  सर्विस  प्रोवाइडर  को  ये  कोड  देंगे  तो  वह  आपके  हैण्ड  सेट  को  ब्लोक  कर  देगा।

             कार की चाबी खोने पर ---

             अगर  आपकी  कार  की  रिमोट  की लेस  इंट्री  है। और  गलती  से  आपकी  चाभी  कार  में  बंद  रह  गयी  है। और दूसरी  चाभी  घर  पर  है। तो  आपका  मोबाइल  काम  आ  सकता  है। घर  में  किसी  व्यक्ति  के  मोबाइल  फोन  पर  कॉल  करें। घर  में  बैठे  व्यक्ति  से  कहें  कि  वह  अपने  मोबाइल  को  होल्ड  रखकर  कार  की  चाभी  के  पास  ले जाएँ और  चाभी  के  अनलॉक बटन  को  दबाये। साथ  ही  आप  अपने  मोबाइल  फोन  को  कार  के  दरवाजे  के  पास  रखें....। दरवाजा खुल जायेगा।

है न विचित्र किन्तु सत्य......!!!

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पत्नी चालीसा

!! पत्नी चालीसा !!

पत्नी सेवा सच्ची सेवा।
जो करे वो खाये मेवा🍩।

जो पत्नी के
पाँव      दबावै    !
बस   ❄  वैकुंठ
परम पद पावै।

जो पत्नी    की
करे      गुलामी    
ना     ❎   आये
कोई   परेशानी    ।

जो  पत्नी       की
धोवे    🃏
साङी  ....👚
उसकी    किस्मत  
जग    🌏   से न्यारी…

भूत   😈 👺 👹 पिशाच निकट   नहिं   आवै।
जो  पत्नी   के
कीर्तन          गावै ।

अतः पत्नी  
खुश        तो
लाईफ    💥   खुश   ।

ध्यान       रहे
पत्नी    सेवा   ही
सभी तीर्थो का पुण्य है।

हाथ जोड़ कर कीजिये,पत्नी जी का ध्यान ।
घर में खुशहाली रहे ,हो जाये कल्यान ।।
घरवाली को नमन कर , माला लेकर हाथ ।
मुख से पत्नी-वन्दना बोलो मेरे साथ ।।

जय पत्नी देवी कल्यानी ।
माया तेरी ना पहचानी ।।
तुमसे सारे देवता हारे ।
डर से थर-थर कांपें सारे ।।
नहिं चरित्र तुम्हरा कोई जाना ।
नर क्या ईश्वर ना पहचाना ।।
अपरम्पार तुम्हारी माया ।
कोई इसका पार न पाया ।।
लगो देखने में तुम गुड़िया ।
हो लेकन आफत की पुड़िया ।।
हे मेरे बच्चों की माता ।
तुम हो मेरी भाग्यविधाता ।।
है बेलन हथियार तुम्हारा ।
जब चाहा सिर पर दे मारा ।।
ऐसी तेरी निकले बोली ।
जैसे हो बंदूक की गोली ।।
हम तुमसे डरते हैं ऐसे ।
चोर पुलिस से डरता जैसे ।।
ऐसा है आतंक तुम्हारा ।
बिच्छू जैसा डंक तुम्हारा ।।
करे पती जो पत्नी-सेवा ।
मिलती उसको सच्ची मेवा ।।
पत्नी-वन्दना जो कोई गावे ।
जीवन में कोई कष्ट न पावे । ।
प्रभु दीक्षित कर पत्नी-वन्दन ।
पत्नी का कर लो अभिनन्दन ।।

वन्दहु पत्नी मुख-कमल,गुणअवगुण की खान ।
मिले नहीं बिन आपके पतियों को सम्मान ।।

।। बोलो पत्नी रानी की जय ।।

पत्नी के फायदे!


पहले मैं बहुत परेशान रहता था हमेशा सोता रहता था। मुझसे काम नही हो पाता था। घर वालों के ताने सुनकर रो दिया करता था। फिर मैंने इस नए प्रोडक्ट के बारे में सुना, जिसका नाम है 'पत्नी'। यह सच में बहुत लाजवाब है। अब मैं अपनी नींद केवल 2-3 घंटे में ही पूरी कर लेता हूँ और हर तरह का काम कर लेता हूँ। दुनिया भर के ताने और गलियाँ हँसते - हँसते सह लेता हूँ। कितनी भी मुसीबत आए हमेशा खुश रहता हूँ। दुःख सुख की फिक्र से ऊपर उठ गया हूँ। नरक और स्वर्ग यहीं है इसका भेद समझ गया हूँ। मुझे अपने दुश्मनों से भी प्यार हो गया है। सच में पत्नी असरदार है। इसलिए अपनी पत्नी की फोटो हमेशा अपने पास रखो और जब भी तुम्हें किसी प्रकार की कोई घबराहट हो तो अपनी पत्नी की फोटो देख लो। तुम ज़रूर कामयाब हो जाओगे क्योंकि अगर तुम अपनी पत्नी को सह सकते हो तो सच में तुम कुछ भी कर सकते हो।

किसने तुमको छला है बोलो, क्यों दुनिया छोड़ चली हो तुम ?

पहला दृश्य --

एक कवि नदी के किनारे खड़ा था !
तभी वहाँ से एक लड़की का शव नदी में तैरता हुआ जा रहा था तो तभी कवि ने उस शव से पूछा ----

कौन हो तुम ओ सुकुमारी,
बह रही नदियां के जल में ?

कोई तो होगा तेरा अपना,
मानव निर्मित इस भू-तल मे !

किस घर की तुम बेटी हो,
किस क्यारी की कली हो तुम ?

किसने तुमको छला है बोलो,
क्यों दुनिया छोड़ चली हो तुम ?

किसके नाम की मेंहदी बोलो,
हांथो पर रची है तेरे ?

बोलो किसके नाम की बिंदिया,
मांथे पर लगी है तेरे ?

लगती हो तुम राजकुमारी,
या देव लोक से आई हो ?

उपमा रहित ये रूप तुम्हारा,
ये रूप कहाँ से लायी हो?
..........

दूसरा दृश्य----

कवि की बाते सुनकर लड़की की आत्मा बोलती
है.....

कवि राज मुझ को क्षमा करो,
गरीब पिता की बेटी हुँ !

इसलिये मृत मीन की भांती,
जल धारा पर लेटी हुँ !

रूप रंग और सुन्दरता ही,
मेरी पहचान बताते है !

कंगन,चूड़ी,बिंदी,मेंहदी,
सुहागन मुझे बनाते है !

पति के सुख को सुख समझा,
पति के दुख में दुखी थी मैं !

जीवन के इस तन्हा पथ पर,
पति के संग चली थी मैं !

पति को मैने दीपक समझा,
उसकी लौ में जली थी मैं !

माता-पिता का साथ छोड
उसके रंग में ढली थी मैं !

पर वो निकला सौदागर ,
लगा दिया मेरा भी मोल !

दौलत और दहेज़ की खातिर
पिला दिया जल में विष घोल !

दुनिया रुपी इस उपवन में,
छोटी सी एक कली थी मैं !

जिस को माली समझा ,
उसी के द्वारा छली थी मैं !

ईश्वर से अब न्याय मांगने,
शव शैय्या पर पड़ी हूँ मैं !

दहेज़ की लोभी इस संसार मैं,
दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ  मैं !

दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ मैं !!

.....................

{[<बेटियां शीतल हवा होती है।। इन्हें बचा कर रखे>]}

अनुरोध है इस कविता को शेयर जरुर करे !!

मंदी में पत्नी के लिए लिखी कविता...

👳मंदी में पति👳की लिखी इक
कवीता अपनी पत्नी को ।

🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊

प्रिय क्यूँ तुम नए-नए
सूट सिलाती हो !

पुरानी साडी में भी तुम
अप्सरा सी नजर आती हो !!!

इन ब्यूटी पार्लरों के
चक्करों में ना पडा करो !

अपने चांद से चेहरे को
क्रीम पाउडर से यूँ ना ढका करो !!

रेस्टोरेंट होटल के खाने में क्या रखा है !

तुम्हारे हाथों से बना घर का खाना,
इनसे लाख गुना अच्छा है !!!

इन सैर सपाटों में वो बात कहाँ !

तुम्हारे मायके जैसा
ऐशो-आराम कहाँ !!!

नौकरों से खिटपिट में,
मत सेहत तुम अपनी खराब करो !

झाडू-पौछा लगा
हल्का सा व्यायाम करो !!!

सोने-चांदी में मिलती
अब सो सो खोट है !

तुम्हारी सुन्दरता ही
24 कैरेट प्योर गोल्ड है !!!

माया-माया मत किया कर पगली,
यह तो महा ठगिनी है !

मेरे इस घर-आंगन की तो,
तू ही असली धन लक्ष्मी है !!

        😀 *हैप्पी मंदी* 😜

बुधवार, 23 अगस्त 2017

जीवन में पैतीस पार का मर्द...

दिल को छुए तो होशला अफजाई चाहूँगा मित्रो...
जीवन में पैतीस पार का मर्द...
कैसा होता है ?
थोड़ी सी सफेदी कनपटियों के पास,
खुल रहा हो जैसे आसमां बारिश के बाद,
जिम्मेदारियों के बोझ से झुकते हुए कंधे,
जिंदगी की भट्टी में खुद को गलाता हुआ,
अनुभव की पूंजी हाथ में लिए,
परिवार को वो सब देने की जद्दोजहद में,
जो उसे नहीं मिल पाया था,
बस बहे जा रहा है समय की धारा में,
एक खूबसूरत सी बीवी,
दो प्यारे से बच्चे,
पूरा दिन दुनिया से लड़ कर थका हारा,
रात को घर आता है, सुकून की तलाश में,
लेकिन क्या मिल पाता है सुकून उसे,
दरवाजे पर ही तैयार हैं बच्चे,
पापा से ये मंगाया था, वो मंगाया था,
नहीं लाए तो क्यों नहीं लाए,
लाए तो ये क्यों लाए वो क्यों नहीं लाए,
अब वो क्या कहे बच्चों से,
कि जेब में पैसे थोड़े कम थे,
कभी प्यार से, कभी डांट कर,
समझा देता है उनको,
एक बूंद आंसू की जमी रह जाती है,
आँख के कोने में,
लेकिन दिखती नहीं बच्चों को,
उस दिन दिखेगी उन्हें, जब वो खुद,
बन जाएंगे माँ बाप अपने बच्चों के,
खाने की थाली में दो रोटी के साथ,
परोस दी हैं पत्नी ने दस चिंताएं,
कभी,
तुम्हीं नें बच्चों को सर चढ़ा रखा है,
कुछ कहते ही नहीं,
कभी,
हर वक्त डांटते ही रहते हो बच्चों को,
कभी प्यार से बात भी कर लिया करो,
लड़की सयानी हो रही है,
तुम्हें तो कुछ दिखाई ही नहीं देता,
लड़का हाथ से निकला जा रहा है,
तुम्हें तो कोई फिक्र ही नहीं है,
पड़ोसियों के झगड़े, मुहल्ले की बातें,
शिकवे शिकायतें दुनिया भर की,
सबको पानी के घूंट के साथ,
गले के नीचे उतार लेता है,
जिसने एक बार हलाहल पान किया,
वो सदियों नीलकंठ बन पूजा गया,
यहाँ रोज़ थोड़ा थोड़ा विष पीना पड़ता है,
जिंदा रहने की चाह में,
फिर लेटते ही बिस्तर पर,
मर जाता है एक रात के लिए,
क्योंकि सुबह फिर जिंदा होना है,
काम पर जाना है, कमा कर लाना है,
ताकि घर चल सके, ताकि घर चल सके....
ताकि घर चल सके।।।।