सोमवार, 6 नवंबर 2017

जो माँ जैसी देवी घर के मंदिर में नहीं रख सकते हैं...

जब आंख खुली तो अम्‍मा की
गोदी का एक सहारा था
उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको
भूमण्‍डल से प्‍यारा था

उसके चेहरे की झलक देख
चेहरा फूलों सा खिलता था
उसके स्‍तन की एक बूंद से
मुझको जीवन मिलता था

हाथों से बालों को नोंचा
पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस मां ने पुचकारा
हमको जी भर के प्‍यार किया

मैं उसका राजा बेटा था
वो आंख का तारा कहती थी
मैं बनूं बुढापे में उसका
बस एक सहारा कहती थी

उंगली को पकड़ चलाया था
पढने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज-
अन्‍तर में सदा सहेजा था

मेरे सारे प्रश्‍नों का वो
फौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के कांटे चुन
वो खुद गुलाब बन जाती थी

मैं बडा हुआ तो कॉलेज से
इक रोग प्‍यार का ले आया
जिस दिल में मां की मूरत थी
वो रामकली को दे आया

शादी की पति से बाप बना
अपने रिश्‍तों में झूल गया
अब करवाचौथ मनाता हूं
मां की ममता को भूल गया

हम भूल गये उसकी ममता
मेरे जीवन की थाती थी
हम भूल गये अपना जीवन
वो अमृत वाली छाती थी

हम भूल गये वो खुद भूखी
रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्‍तर देकर
खुद गीले में सो जाती थी

हम भूल गये उसने ही
होठों को भाषा सिखलायी थी
मेरी नीदों के लिए रात भर
उसने लोरी गायी थी

हम भूल गये हर गलती पर
उसने डांटा समझाया था
बच जाउं बुरी नजर से
काला टीका सदा लगाया था

हम बडे हुए तो ममता वाले
सारे बन्‍धन तोड़ आए
बंगले में कुत्‍ते पाल लिए
मां को वृद्धाश्रम छोड आए

उसके सपनों का महल गिरा कर
कंकर-कंकर बीन लिए
खुदग़र्जी में उसके सुहाग के
आभूषण तक छीन लिए

हम मां को घर के बंटवारे की
अभिलाषा तक ले आए
उसको पावन मंदिर से
गाली की भाषा तक ले आए

मां की ममता को देख मौत भी
आगे से हट जाती है
गर मां अपमानित होती
धरती की छाती फट जाती है

घर को पूरा जीवन देकर
बेचारी मां क्‍या पाती है
रूखा सूखा खा लेती है
पानी पीकर सो जाती है

जो मां जैसी देवी घर के
मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्‍य भले कर लें
इंसान नहीं बन सकते हैं

मां जिसको भी जल दे दे
वो पौधा संदल बन जाता है
मां के चरणों को छूकर पानी
गंगाजल बन जाता है

मां के आंचल ने युगों-युगों से
भगवानों को पाला है
मां के चरणों में जन्‍नत है
गिरिजाघर और शिवाला है

हिमगिरि जैसी उंचाई है
सागर जैसी गहराई है
दुनियां में जितनी खुशबू है
मां के आंचल से आई है

मां कबिरा की साखी जैसी
मां तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली
खुसरो की अमर रूबाई है

मां आंगन की तुलसी जैसी
पावन बरगद की छाया है
मां वेद ऋचाओं की गरिमा
मां महाकाव्‍य की काया है

मां मानसरोवर ममता का
मां गोमुख की उंचाई है
मां परिवारों का संगम है
मां रिश्‍तों की गहराई है

मां हरी दूब है धरती की
मां केसर वाली क्‍यारी है
मां की उपमा केवल मां है
मां हर घर की फुलवारी है

सातों सुर नर्तन करते जब
कोई मां लोरी गाती है
मां जिस रोटी को छू लेती है
वो प्रसाद बन जाती है

मां हंसती है तो धरती का
ज़र्रा-ज़र्रा मुस्‍काता है
देखो तो दूर क्षितिज अंबर
धरती को शीश झुकाता है

माना मेरे घर की दीवारों में
चन्‍दा सी मूरत है
पर मेरे मन के मंदिर में
बस केवल मां की मूरत है

मां सरस्‍वती लक्ष्‍मी दुर्गा
अनुसूया मरियम सीता है
मां पावनता में रामचरित
मानस है भगवत गीता है

अम्‍मा तेरी हर बात मुझे
वरदान से बढकर लगती है
हे मां तेरी सूरत मुझको
भगवान से बढकर लगती है

सारे तीरथ के पुण्‍य जहां
मैं उन चरणों में लेटा हूं
जिनके कोई सन्‍तान नहीं
मैं उन मांओं का बेटा हूं

हर घर में मां की पूजा हो
ऐसा संकल्‍प उठाता हूं
मैं (कमल अग्रवाल) दुनियां की हर मां के
चरणों में ये शीश झुकाता हूं...

शनिवार, 4 नवंबर 2017

मम्मी, मैया, माई, मां

लेती नहीं दवाई मां
जोड़े पाई-पाई मां

दुःख थे पर्वत, राई मां
हारी नहीं लड़ाई मां

इस दुनियां में सब मैले हैं,
किस दुनियां से आई मां

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
गरमागर्म रजाई मां

जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
करती है तुरपाई मां

बाबू जी तनख़ा लाये बस,
लेकिन बरक़त लाई मां

बाबूजी थे सख्त मगर ,
माखन और मलाई मां

बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई मां

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
मम्मी, मैया, माई, मां

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
मगर नहीं कह पाई  मां

घर में चूल्हे मत बाँटो रे,
देती रही दुहाई मां

बाबूजी बीमार पड़े जब,
साथ-साथ मुरझाई मां

रोती है लेकिन छुप-छुप कर,
बड़े सब्र की जाई मां

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई मां

बेटी रहे ससुराल में खुश,
सब ज़ेवर दे आई मां

मां से घर, घर लगता हैं,
घर में घुली, समाई मां

बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाईमां

दर्द बड़ा हो या छोटा हो,
याद हमेशा आई मां

घर के शगुन सभी मां से,
हैं घर की शहनाई मां

सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराई मां

गुरुवार, 2 नवंबर 2017

यह(भारत) अजीब मुल्क हैं...

यह अजीब मुल्क है, रिश्वत सुविधा शुल्क है ।
काम होगा मरजी से, जल्दी है तो शुल्क है ।

यह नदियों का मुल्क है, पानी भी भरपूर है ।
बोतल में बिकता है, पन्द्रह रू. शुल्क है ।

यह शिक्षकों का मुल्क है, स्कूल भी खुब है ।
बच्चे पढने जाते नहीं, पाठशालाएं  नि:शुल्क है ।

यह गरीबों का मुल्क है, जनसंख्या भी भरपूर है ।
परिवार नियोजन मानते नहीं, नसबन्दी नि:शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क है, निर्बलों पर हर शुल्क है ।
अगर आप हो बाहुबली, हर सुविधा नि:शुल्क है ।

यह अपना ही मुल्क है, कर कुछ सकते नहीं,
कह कुछ सकते नहीं, बोलना नि : शुल्क है ।

यह शादियों का मुल्क है, दान दहेज भी खुब है ।
शादी करने को पैसा नहीं, कोर्ट मेरिज नि:शुल्क है ।

यह पर्यटन मुल्क है, रेले भी खुब है ।
बिना टिकट पकङे गये, रोटी कपङा नि : शुल्क है ।

यह धनी मुल्क है, कपङे खऱिदने को पैसे नहीं ।
आधे कपङे पहन के कहते, यह हमारी शान है ।

यह अजीब मुल्क है, हर जरूरत पर शुल्क है ।
ढूंढ कर देते है लोग सलाह नि : शुल्क है ।

यह आवाम का मुल्क है, रहबर चुनने का हक है ।
वोट देने जाते नहीं, मतदान  नि : शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क है, यह अजीब मुल्क है ।

शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

षष्ठी देवी की उपासना का दिन छठ पर्व

देवी षष्ठी सूर्य की बहन है ये सूर्य की पहली किरण कहलाती है । ये ब्रह्मा की मानसी कन्या है, स्वामी कार्तिकेय की अधिकारिणी पत्नी है ।इनहे मातृकाओ मे देवसेना के नाम से जाना जाता है । यह संतान देने वाली और पुत्रो की अधिषठात्रि देवी है । बालको को दीर्घ आयु प्रदान करना और उनके रक्षण का काम करती है । यह गर्भाशय की अधिषठात्रि देवी है इनकी उपासना से गर्भाशय के समस्त रोग समाप्त हो जाते है। देवी षष्ठी शासन करने वाले पुत्रो को उतपन्न करती है।अगर आप चाहते है की आपका पुत्र शासन करने वाला हो, कोई उच्च पद पर आसीन हो, विधायक, सांसद प्रतिनिधि, मंत्री, प्रधानमंत्री आदि शासन करने वाले उच्च पद पर आसीन हो तो इसके लिए आपको देवी षष्ठी की उपासना करनी चाहिए । बालको के समस्त रोगों को ये समाप्त कर देती है । बिल्ली इनकी सवारी है और एक बालक को गोद मे ले रखा है और दूसरे बालक की उगली पकड रखी है।कार्तिक छठ तिथि को इनका पूजन करें और हर माह की शुक्ल पक्ष की छठ तिथि को इनका पूजन व व्रत करना चाहिए ।
ये छठ माता यानि जिन्हें षष्ठी देवी के नाम से जाना जाता है का अत्यंत महत्वपूर्ण दुर्लभ चित्र है ।
जय छठ माता जय षष्ठी माता ।

बुधवार, 25 अक्टूबर 2017

किसकी शरीर मृत्यु के बाद जमीन में गाड़ दी जाती है

रामायण में पड़ा होगा
जब श्री राम को वनवास हो जाता है तो श्री राम ,लक्ष्मण और सीता जी वन से गुजरते हुए जाते है | रास्ते में उन्हे विराट नाम का राक्षस मिलता है ,राम जी उसे मार देते है ,जब विराट की अंतिम सांसे चल रही होती है तब राम जी उससे पूछते है > मै तुम्हारा अंतिम संस्कार कैसे करू मुझें नही पता
हम इंसानो को तो जला के उनका अंतिम संस्कार करते है पर राक्षसों का अंतिम संस्कार कैसे करे ये हमें नही पता अब तुम बताओ कि तुम्हारा अंतिम संस्कार कैसे करू,
तब राक्षस विराट कहता है--- हे राम ,हम राक्षसो के अंतिम संस्कार की यह परंपरा हमारे पूर्वजो ( राक्षसो) ने ही बनाई है, हम राक्षसो को मरने के बाद भूमि मे गाड़ दिया जाता है ,संपूर्ण राक्षस जाति इसी प्रकार संस्कार करती है ,मैं राक्षस हू अतः तुम मुझे भी भूमि मे ही गाड़ दें
इस तरह यह स्पष्ट है की राक्षसों को गाडने की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है और आज भी गाड़ा जाता है, वो भी राक्षस ही है।

सोमवार, 23 अक्टूबर 2017

तुलसी कौन थी?

तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.
वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी.
एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा``` -
स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर``` आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प
नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।
सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता ।
फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।
भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे
ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?
उन्होंने पूँछा - आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।
सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे
सती हो गयी।
उनकी राख से एक पौधा निकला तब
भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से
इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में
बिना तुलसी जी के भोग```
```स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में```
```किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !```

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

सेकूलर कौन है..?

सेकूलर वो लोग होता है जिसका नाम तो हिंदूओं जैसा होता है लेकिन वह अपने हिंदू होने पर बेहद शर्मिंदा होता है।
- सेकूलर वो आदमी होता है जो आवारा कुत्तों को पकड कर शहर से बाहर करने पर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को इंसानियत का विरोधी करार देता है लेकिन घर में गाय काट कर खाने का ख्बाव देखता है।
- सेकूलर वो होता है जो दिवाली पर छाती कूट-कूट कर फेसबुक और व्हाट़सएप पर मार्मिक अपील करता है कि दिवाली पर प्रदूषण न फैलाएं, पटाखे न जलाएं। लेकिन ईद पर एक बार भी नहीं बोलता की बिना जानवरों का कत्ल किए ईद मनाई जाए।
- सेकूलर वो आदमी है जो आतंकवादी को सजा मिलने पर उसके लिए उसके मजबह को जोड देता है जबकि देश के लिए जान गंवाने वाले के लिए बोलता है कि सैनिक तो पैदा ही मरने के लिए होते हैं।
- सेकूलर वो होता है जो गाय को काटकर खाने वाले परिवार को इनाम में 45 लाख देता है, जबकि गौ-तस्करों को पकड रहे सब इंस्पेक्टर की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने पर 5 लाख भी नहीं देता है।
- सेकूलर वो होता है जिसे वंदे मातरम कहना सांप्रदायिक लगता है अरे क्या क्या बताऊं कि सेकूलर क्या होता है.. बस इतना समझ लो कि कोई इंसान की शक्ल में भेडिया जैसा होता है सेकूलर होता है।